देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अगर सिस्टम ईमानदारी से काम करे तो सड़कों पर भीख मांगने को मजबूर जिंदगी भी सम्मान के शिखर तक पहुंच सकती है। भिक्षावृत्ति छोड़ आत्मनिर्भर बने इंदौर के जांबाज अब गणतंत्र दिवस 2026 की परेड में कर्तव्य पथ पर विशेष अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कभी जिन्हें समाज ने नजरअंदाज किया, आज वही लोग देश के सामने गर्व और सम्मान के साथ खड़े नजर आएंगे।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा देशभर से चुने गए 100 नागरिकों में इंदौर के 5 प्रतिनिधियों का चयन हुआ है। यह चयन प्रधानमंत्री के भिक्षावृत्ति मुक्त भारत के संकल्प को जमीन पर साकार करने की मजबूत मिसाल है। परेड से एक दिन पहले इन सभी विशेष अतिथियों की केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार खटीक के साथ चर्चा और सहभोज का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है।
इन जांबाजों का दिल्ली पहुंचना भी अपने आप में खास होगा। कलेक्टर शिवम वर्मा की पहल पर इन्हें सड़क मार्ग से नहीं बल्कि हवाई जहाज से दिल्ली भेजा जाएगा। यह सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि उस संघर्ष और आत्मसम्मान का सम्मान है, जिसमें इन लोगों ने भिक्षावृत्ति को छोड़कर आत्मनिर्भर जीवन को अपनाया। जिला प्रशासन, नगर निगम, संस्था प्रवेश, महिला एवं बाल विकास विभाग और श्रम विभाग के संयुक्त प्रयासों से इंदौर देश का पहला भिक्षावृत्ति मुक्त शहर बन सका है।
इस दल में 11 साल की आरती प्रजापति भी शामिल हैं, जो कभी सड़कों पर भीख मांगने को मजबूर थी और आज शासकीय स्कूल में कक्षा चौथी की मेधावी छात्रा है। ज्योति प्रजापति अब गेस्ट हाउस में हाउसकीपिंग कर सम्मानजनक आजीविका चला रही हैं, जबकि रवि यादव अपने हुनर से गोबर से गणेश मूर्ति बनाकर स्वरोजगार से जुड़ चुके हैं। इनके साथ संस्था प्रवेश की प्रतिनिधि रूपाली जैन और रूपेंद्र दोशी भी विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किए गए हैं।
भारत सरकार की SMILE योजना के तहत इंदौर में अब तक करीब 5,500 लोगों को भिक्षावृत्ति के दलदल से बाहर निकालकर पुनर्वासित किया जा चुका है। बच्चों को शिक्षा से जोड़ा गया, वयस्कों को नशा मुक्ति और रोजगार मिला, जबकि बीमार बुजुर्गों और मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों का इलाज कराया गया। इंदौर की यह पहल पूरे देश के लिए एक मजबूत संदेश है कि सही नीयत, संवेदनशील प्रशासन और सख्त कार्रवाई से समाज की तस्वीर बदली जा सकती है।

