इंदौर। मध्य प्रदेश की राजनीति उस वक्त और गरमा गई, जब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी वोटर लिस्ट से गलत तरीके से नाम काटने के मामले में एफआईआर दर्ज कराने राजेंद्र नगर थाने पहुंचे। थाने के बाहर ही पटवारी ने चुनाव प्रक्रिया, वोटर लिस्ट और सरकार के मंत्रियों को लेकर एक के बाद एक गंभीर आरोप लगाए और सियासी माहौल में नया तूफान खड़ा कर दिया।
जीतू पटवारी ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग की मिलीभगत से आम नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी संगठन ने अपने मंत्रियों और पदाधिकारियों को जिलों में जिम्मेदारी दी थी कि अपने वोट बचाओ और कांग्रेस समर्थकों के नाम कटवाओ। पटवारी के मुताबिक फॉर्म–7 का खुलेआम दुरुपयोग किया गया और बड़ी संख्या में लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए। कई जगह तो नागरिकों को नोटिस भेजकर उन्हें भारत का नागरिक तक नहीं बताया गया।
पटवारी ने साफ कहा कि आने वाले दिनों में कांग्रेस कार्यकर्ता पूरे प्रदेश के थानों में जाकर शिकायत दर्ज कराएंगे। उन्होंने बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO को भी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर किसी अधिकारी ने गलत तरीके से नाम काटा है तो उसके खिलाफ भी एफआईआर कराई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ी तो पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की जाएगी और पूरे मामले को अदालत तक ले जाया जाएगा।
अपने बयान में पटवारी ने 30 जनवरी का जिक्र करते हुए नाथूराम गोडसे और महात्मा गांधी की हत्या का संदर्भ जोड़ा और कहा कि नफरत की विचारधारा आज भी लोकतंत्र को कमजोर कर रही है और समाज को बांटने का काम कर रही है। इसके बाद उन्होंने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं, जिनमें आम लोगों की जान जा रही है, लेकिन जिम्मेदार मंत्रियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि जिन मंत्रियों पर विवाद और गंभीर आरोप हैं, उन्हें पद से हटाने की बजाय सदन में बनाए रखा गया है। पानी के मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश की बड़ी आबादी को शुद्ध पेयजल तक नसीब नहीं हो रहा है और हालात ऐसे हैं कि लोग दूषित पानी पीकर बीमार पड़ रहे हैं। कांग्रेस ने साफ संकेत दे दिए हैं कि वह वोटर लिस्ट, मंत्रियों की जवाबदेही और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर सड़क से लेकर अदालत और विधानसभा तक संघर्ष करेगी। आने वाले दिनों में इन आरोपों के चलते मध्य प्रदेश की राजनीति और ज्यादा गरमाने के आसार साफ नजर आ रहे हैं।

