सम्मान की जंग में उतरे अतिथि शिक्षक, 18 साल का वनवास खत्म करने सरकार से आर-पार की लड़ाई का ऐलान

 भोपाल। मध्यप्रदेश के शासकीय स्कूलों में वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षक अब अपने हक की लड़ाई के लिए खुलकर मैदान में उतर आए हैं और 18 वर्षों से चल रही अस्थिरता और कम मानदेय के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान कर दिया है।

प्रदेशभर के अतिथि शिक्षक, जो खुद को शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ मानते हैं, लंबे समय से बेहद कम वेतन में काम करते हुए भी उत्कृष्ट परिणाम देते रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उनका भविष्य आज भी असुरक्षित बना हुआ है। हर चुनाव में मिले आश्वासनों से निराश होकर अब उन्होंने ‘एक मंच, एक परिवार’ के बैनर तले एकजुट होकर निर्णायक संघर्ष का रास्ता चुना है।

अतिथि शिक्षकों की सबसे बड़ी मांग है कि उन्हें Haryana मॉडल के आधार पर वरिष्ठता और अनुभव के मुताबिक संविदा शिक्षक बनाया जाए और तीन साल की संतोषजनक सेवा के बाद नियमित शिक्षक का दर्जा दिया जाए, ताकि उन्हें स्थायित्व और सम्मान मिल सके।

इस आंदोलन को और मजबूत करने के लिए प्रदेश के कई बड़े संगठन एक साथ आए हैं, जिनमें आजाद अतिथि शिक्षक संघ, Bharatiya Mazdoor Sangh से संबद्ध अतिथि शिक्षक संघ, अतिथि शिक्षक संघ समन्वय समिति और संयुक्त अतिथि शिक्षक संघ शामिल हैं।

इसी कड़ी में 28 मार्च 2026 से Bhopal में बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा, जहां हजारों की संख्या में अतिथि शिक्षक एकत्र होकर सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाएंगे और अपनी मांगों को लेकर निर्णायक दबाव बनाएंगे।

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