ग्वालियर जनसुनवाई में छलका दर्द: भूमाफियाओं से टूटे किसान ने आत्महत्या को बताया आखिरी रास्ता, अफसरों की लापरवाही से महिला को नहीं मिल रहा संबल योजना का हक

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में मंगलवार को हुई कलेक्टर जनसुनवाई में एक बार फिर सिस्टम की खामियां और आम लोगों का दर्द खुलकर सामने आ गया। न्याय की आस लेकर पहुंचे फरियादियों ने अफसरों के सामने अपनी पीड़ा रखी, जहां किसी ने जमीन बचाने की गुहार लगाई तो किसी ने सरकारी योजना का हक दिलाने की।

जनसुनवाई के दौरान सबसे मार्मिक मामला एक छोटे किसान का रहा, जिसने भूमाफियाओं के कब्जे से परेशान होकर आत्महत्या को आखिरी रास्ता बताया। ग्वालियर शहर के हारकोटा सीर इलाके में रहने वाले किसान लक्ष्मन सिंह कुशवाह अपनी पुश्तैनी साढ़े पांच बीघा जमीन पर खेती कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे, लेकिन आरोप है कि मुकेश और उसके साथियों ने उनकी जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया। किसान का कहना है कि बेलदार का पुरा सर्वे नंबर बताकर उसकी हारकोटा सीर सर्वे नंबर की जमीन पर प्लॉटिंग की जा रही है और पूरी जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया है।

लक्ष्मन सिंह ने बताया कि जमीन छिन जाने के बाद वह खेती छोड़ मजदूरी करने को मजबूर है। उसने कई बार पुलिस और प्रशासन से शिकायत की, लेकिन कहीं भी उसकी सुनवाई नहीं हुई। न्याय न मिलने से टूट चुके किसान ने जनसुनवाई में साफ शब्दों में कहा कि अब उसके पास आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। किसान की बात सुनकर अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट सीबी प्रसाद ने मामले को गंभीरता से लेते हुए लश्कर एसडीएम को मौके पर जाकर जांच के निर्देश दिए हैं और जांच रिपोर्ट भी तलब की गई है।

जनसुनवाई में दूसरा मामला थाटीपुर इलाके की एक महिला से जुड़ा रहा, जिसे अधिकारियों की लापरवाही के चलते दो साल बाद भी संबल योजना का लाभ नहीं मिल पाया। मधुवन कॉलोनी में रहने वाली सुनीता सविता ने बताया कि उनके पति बंशीलाल की दो साल पहले मृत्यु हो गई थी। बंशीलाल पेशे से मजदूर थे और उनके पास मध्य प्रदेश सरकार की संबल योजना का कार्ड भी था, लेकिन पति की मौत के बाद नियमों के तहत मिलने वाली अंत्येष्टि राशि और दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता आज तक नहीं मिली।

सुनीता ने बताया कि वह पिछले दो साल से नगर निगम और प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काट रही है, लेकिन हर जगह सिर्फ आश्वासन मिले। पति की मौत के बाद वह घर-घर काम कर अपने परिवार का पेट पाल रही है। जनसुनवाई में महिला की ओर से मौजूद वकील ने चेतावनी दी कि अगर न्याय नहीं मिला तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। मामले को गंभीरता से लेते हुए एडीएम ने नगर निगम अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नियमों के तहत महिला को तत्काल मदद दी जाए और यह जांच की जाए कि संबल योजना की राशि में अब तक क्या खामी रही।

जनसुनवाई में सामने आए इन दोनों मामलों ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर कब आम लोगों को समय पर न्याय और योजनाओं का लाभ मिलेगा। किसान और मजदूर वर्ग की यह पीड़ा प्रशासन के लिए बड़ी चेतावनी मानी जा रही है।

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