मध्य प्रदेश में अचानक बदले मौसम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रदेश के कई जिलों में बारिश और ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। शाजापुर जिले में गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है, जबकि मुरैना में सरसों और चना की फसल को नुकसान हुआ है। मामले को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर किसानों को राहत देने की मांग की है। वहीं राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने नुकसान का सर्वे कर मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं।
शाजापुर जिले में मंगलवार शाम अचानक हुई बारिश और तेज ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी। खेतों में खड़ी गेहूं की फसल औंधे मुंह गिर गई, जिससे अन्नदाताओं के चेहरों पर मायूसी छा गई। किसान साहिद अली ने बताया कि शाजापुर में इस तरह की ओलावृष्टि पहली बार देखी है। उन्होंने तीन बीघा में गेहूं की फसल लगाई थी, जो पूरी तरह से नष्ट हो गई है। किसानों को अब सरकार से मुआवजे की उम्मीद है ताकि हुए नुकसान की भरपाई हो सके।
मुरैना जिले में भी मावठे की बारिश के साथ कई इलाकों में तेज ओलावृष्टि हुई है। इससे खेतों में खड़ी सरसों और चना की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। अचानक बदले मौसम से किसानों की चिंता बढ़ गई है। सरसों की फलियां झड़ने से उत्पादन घटने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों को ज्यादा नुकसान हुआ है और मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे तक सतर्क रहने की चेतावनी दी है।
ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान को लेकर राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने सभी कलेक्टरों और तहसीलदारों को तत्काल सर्वे करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जहां 100 प्रतिशत फसल नुकसान हुआ है, वहां 32 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की राहत राशि दी जाएगी। जितना नुकसान होगा, उसी अनुपात में मुआवजा मिलेगा। कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तुरंत सर्वे रिपोर्ट पेश करें ताकि किसानों को जल्द राहत मिल सके।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में बताया कि सीहोर, आगर-मालवा, उज्जैन, ग्वालियर, मुरैना, शिवपुरी और शाजापुर समेत कई जिलों में ओलावृष्टि से गेहूं, चना, सरसों और मसूर की फसलें बर्बाद हो गई हैं। उन्होंने मांग की है कि जल्द से जल्द सर्वे कराकर किसानों को मुआवजा दिया जाए, ताकि इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित अन्नदाताओं को राहत मिल सके।

