इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में धड़ल्ले से चल रहे अवैध अस्पतालों का मामला अब सीधे हाईकोर्ट की सख्त निगरानी में आ गया है। बुधवार को इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच, जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी के सामने इस मामले की सुनवाई हुई, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही कोर्ट के सामने उजागर हो गई।
सुनवाई के दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी माधव हासानी खुद कोर्ट में मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि अवैध अस्पतालों की जांच के लिए 8 सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी, जिसमें कई वरिष्ठ डॉक्टर और अधिकारी शामिल थे, लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि CMHO खुद अपनी ही बनाई जांच कमेटी की रिपोर्ट से संतुष्ट नजर नहीं आए।
कोर्ट को बताया गया कि जांच कमेटी के कामकाज पर सवाल खड़े हुए हैं और संबंधित सदस्यों को शोकॉज नोटिस देने की तैयारी की जा रही है। यानी जांच भी हुई, रिपोर्ट भी बनी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग को अपनी ही रिपोर्ट पर भरोसा नहीं है।
वहीं याचिकाकर्ता चर्चित शास्त्री की ओर से पेश वकीलों ने कोर्ट को बताया कि पूरे मामले में जानबूझकर देरी की जा रही है। आरोप लगाया गया कि कई अस्पताल फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के सहारे चल रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय सिर्फ समय मांग रहे हैं।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और CMHO को साफ निर्देश दिए कि दो हफ्ते के भीतर पूरी जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए। इसके साथ ही नगर निगम इंदौर को भी इस मामले में जवाब दाखिल करने के आदेश दिए गए हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब जांच करने वाली कमेटी पर ही स्वास्थ्य विभाग को भरोसा नहीं, तो आखिर अब तक शहर में कितने अवैध अस्पताल मरीजों की जान से खेलते रहे हैं।

