जबलपुर। Madhya Pradesh High Court ने एक सुनवाई के दौरान सरकारी वकील के रवैए पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी वकीलों की नियुक्ति केवल मेरिट के आधार पर होनी चाहिए और उन्हें कोर्ट की सहायता के लिए पूरी तैयारी के साथ पेश होना चाहिए।
दरअसल एक हत्या के मामले की सुनवाई के दौरान यह स्थिति सामने आई, जब सरकारी वकील कोर्ट में जजों के सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। इस पर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वकील बिना फाइल पढ़े ही कोर्ट में पेश हो गए।
मामले की सुनवाई Vivek Agarwal और Ratnesh Chandra Singh की खंडपीठ में चल रही थी। सुनवाई के दौरान दोनों न्यायाधीशों ने सरकारी पक्ष की तैयारी पर सवाल उठाए और इसे गंभीर मामला बताया।
अदालत ने यह भी कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके वकील कोर्ट में पूरी तैयारी के साथ आएं, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में सही तरीके से सहयोग मिल सके।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने Chief Secretary of Madhya Pradesh को निर्देश दिए कि सरकारी अधिवक्ताओं की क्षमता और कार्यप्रणाली की समीक्षा की जाए। साथ ही अदालत ने सरकारी वकीलों की सूची का पुनरीक्षण करने और योग्य व सक्षम अधिवक्ताओं को ही नियुक्त करने पर जोर दिया।

