जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में गंदे नाले के पानी से सब्जियां उगाने का मामला अब हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंच गया है, जहां जांच में बेहद गंभीर और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने हाईकोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि शहर के लगभग सभी नालों का पानी भारी मात्रा में सीवेज से दूषित है, जो अत्यंत प्रदूषित है और न तो पीने योग्य है, न निस्तार के लिए और न ही सिंचाई के उपयोग के लायक है।
MPPCB की रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि अगर यह दूषित पानी वाटर पाइपलाइन में मिल गया तो गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा हो सकता है। इसी पानी से सब्जियों की सिंचाई होने पर जहरीले तत्व सीधे लोगों की थाली तक पहुंच रहे हैं, जिससे कैंसर, हेपेटाइटिस और अन्य घातक बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि घरों से निकलने वाला सीवेज नालों में मिलने से तुरंत रोका जाए, सीवेज को अनिवार्य रूप से ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ा जाए और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सुझावों पर सरकार तत्काल अमल करे। कोर्ट ने अमल की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के भी आदेश दिए हैं।
यह मामला न्यूज रिपोर्ट्स के आधार पर जनहित याचिका के रूप में स्वतः संज्ञान में लिया गया है, क्योंकि यह सीधे तौर पर आम लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है। मामले की अगली सुनवाई अब 2 फरवरी को होगी।

