मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में एक ऐसा फैसला आया है जिसने न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा और मजबूत कर दिया है। 10 वर्षीय दलित बालिका से हुए जघन्य दुष्कर्म के मामले में अदालत ने आरोपी को उसके शेष प्राकृत जीवनकाल तक यानी जीवन भर के लिए जेल भेज दिया है। यह फैसला न सिर्फ कठोर है बल्कि आने वाले समय के लिए एक कड़ा संदेश भी माना जा रहा है।
यह पूरा मामला मऊगंज जिले के लौर थाना क्षेत्र का है, जहां 23 मई 2025 को 10 साल की मासूम के साथ दुष्कर्म की घटना सामने आई थी। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस तुरंत सक्रिय हुई और उसी दिन आरोपी कृष्णपाल गिरी उर्फ भोले गिरी, उम्र 29 साल, को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने न सिर्फ तेजी दिखाई, बल्कि डीएनए परीक्षण सहित सभी वैज्ञानिक सबूत समय पर इकट्ठे किए। मामले की विवेचना इतनी तेजी से चली कि घटना के महज दो महीने बाद, 22 जुलाई 2025 को पुलिस ने चार्जशीट अदालत में पेश कर दी।
मामले की पैरवी विशेष लोक अभियोजक अजय कुमार सिंह और पीड़िता पक्ष के अधिवक्ता उमेश सिंह बघेल ने मजबूती से की। अदालत ने 15 अभियोजन गवाहों के बयान, वैज्ञानिक सबूत और केस की गंभीरता के आधार पर आरोपी को सबसे कठोर सजा सुनाई है। विशेष POCSO न्यायालय रीवा ने आरोपी को धारा 5M/6 POCSO सहपठित 65(2) BNS के तहत शेष प्राकृत जीवनकाल तक आजीवन कारावास की सजा दी है। इसके साथ ही SC/ST एक्ट की धारा 3(2)(V) समेत अन्य धाराओं में भी आजीवन कारावास का प्रावधान लागू किया गया है।
पुलिस अधीक्षक मऊगंज दिलीप सोनी ने प्रेस वार्ता में इस निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि यह फैसला उन सभी मामलों के लिए मिसाल है, जहां पीड़ितों को न्याय के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। अदालत का यह निर्णय समाज में यह संदेश देता है कि बच्चों के साथ ऐसी अमानवीय घटनाओं के दोषियों के लिए कोई राहत नहीं है।
इस ऐतिहासिक फैसले ने एक बार फिर साबित किया है कि न्याय में देरी हो सकती है, लेकिन जब न्याय होता है, तो वह दृढ़ और प्रभावी होता है।

