उज्जैन। सोमवार को 77वां गणतंत्र दिवस पूरे देश में धूमधाम से मनाया गया और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपने गृह नगर उज्जैन में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। उज्जैन के लिए यह क्षण ऐतिहासिक रहा, क्योंकि पहली बार शिप्रा नदी के तट पर सिंहस्थ मेला क्षेत्र स्थित कार्तिक मेला ग्राउंड में गणतंत्र दिवस का आयोजन हुआ। इससे पहले यह समारोह दशहरा मैदान पर आयोजित किया जाता रहा है। इस नए स्थल पर आयोजन का उद्देश्य वर्ष 2028 में प्रस्तावित सिंहस्थ महाकुंभ के प्रचार-प्रसार को भी मजबूती देना रहा।
निर्धारित समय पर सुबह 8 बजकर 55 मिनट पर मुख्यमंत्री आयोजन स्थल पहुंचे और विधिवत रूप से तिरंगा फहराया। इसके बाद तीन रंगों के गुब्बारे आसमान में छोड़े गए, जिससे माहौल देशभक्ति से सराबोर हो गया। मुख्यमंत्री खुली जीप में सवार होकर परेड की सलामी लेते नजर आए, इस दौरान कलेक्टर रोशन कुमार सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा भी उनके साथ मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपने संबोधन में सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने भावांतर योजना के तहत किसानों को मिले लाभ और केंद्र सरकार की आवास योजनाओं के आंकड़े साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां एक ही वर्ष में दो अलग-अलग स्थानों पर मेट्रो ट्रेन शुरू की गई। उन्होंने उज्जैन और इंदौर को जोड़कर एक मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित करने की योजना की भी जानकारी दी।
कार्तिक मेला ग्राउंड पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी शानदार प्रस्तुति देखने को मिली। सिंहस्थ महाकुंभ से जुड़ी धार्मिक कथा को झांकियों के माध्यम से दर्शाया गया, जिसमें समुद्र मंथन की झांकी खास आकर्षण का केंद्र रही। स्वच्छ भारत समृद्ध भारत का संदेश दिया गया और विभिन्न आदिवासी समूहों ने पारंपरिक वेशभूषा में मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किए। सरकार के अलग-अलग विभागों की उपलब्धियों से जुड़ी झांकियां भी परेड में शामिल रहीं।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस डॉग स्क्वॉड ने बेग चेकिंग, संदिग्धों की पहचान और अग्नि के गोलों के बीच कूदने जैसी कलाओं का प्रदर्शन किया। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव शिप्रा नदी के घाट पर पहुंचे, जहां उन्होंने हाथों में तिरंगा लेकर लहराया। शिप्रा नदी में तिरंगे की थीम पर सजी एक दर्जन से अधिक नावें और एक साथ उड़ते तीन रंगों के गुब्बारे बेहद मनोरम दृश्य पेश कर रहे थे। इस ऐतिहासिक आयोजन में आकाश, जल और थल तीनों ही तिरंगे के रंगों से सराबोर नजर आए।

