नेता प्रतिपक्ष और रायबरेली सांसद राहुल गांधी के दो दिवसीय दौरे के दौरान एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया, जब उनके करीबी लोगों पर मीडिया से अभद्रता करने के आरोप लगे। हैरानी की बात यह रही कि यह पूरी घटना राहुल गांधी के सामने होती रही और वे चुपचाप सब देखते रहे। इस घटना के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या राहुल गांधी की खामोशी उनके आसपास मौजूद चाटुकारों और गुटबाजों का किला और मजबूत कर रही है।
स्थानीय पत्रकारों, कांग्रेस के असंतुष्ट कार्यकर्ताओं और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि राहुल गांधी ऐसे लोगों के घेरे में घिरे हुए हैं, जो जानबूझकर उन्हें जनता, जमीनी कार्यकर्ताओं और मीडिया से दूर रखते हैं। आरोप है कि यही लोग राहुल गांधी के नाम पर सत्ता और प्रभाव का इस्तेमाल कर बदसलूकी करते हैं, लेकिन उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है।
आईटीआई ग्राउंड स्थित राजीव गांधी स्टेडियम में रायबरेली प्रीमियर लीग टी-20 टूर्नामेंट के उद्घाटन के दौरान वायरल वीडियो में एक व्यक्ति खुलेआम “मीडिया हटाओ, मीडिया हटाओ” चिल्लाते हुए पत्रकारों को धक्के देता नजर आ रहा है। यह सब कुछ राहुल गांधी के ठीक सामने हुआ, लेकिन उन्होंने न तो आपत्ति जताई और न ही अपने लोगों को रोकने की कोशिश की। इसी चुप्पी ने अब कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय पत्रकारों और कांग्रेस के कुछ नाराज कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। उनका आरोप है कि राहुल गांधी लंबे समय से चाटुकारों के एक ऐसे घेरे में हैं, जो बाज की तरह नजर रखते हैं और किसी को भी गांधी परिवार के करीब नहीं आने देते। यही लोग जनता की शिकायतें, कार्यकर्ताओं की बातें और मीडिया के सवाल राहुल गांधी तक पहुंचने से पहले ही रोक देते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पार्टी के भीतर और बाहर नाराजगी बढ़ती जा रही है। जमीनी स्तर पर असंतोष चरम पर पहुंच रहा है और कांग्रेस की छवि एक जन-विरोधी और अहंकारी पार्टी के रूप में बनने लगी है। सवाल यह है कि जो पार्टी गरीबों, मजदूरों और आम जनता की बात करने का दावा करती है, वही पार्टी आज मीडिया और जनता के साथ बदसलूकी की घटनाओं पर चुप क्यों है। यही खामोशी अब राहुल गांधी की सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

