लखनऊ.विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक को बसपा सुप्रीमो मायावती ने सही ठहराया है। उन्होंने कहा कि अगर इन नियमों को लागू करने से पहले सभी वर्गों को विश्वास में लिया गया होता, तो आज देश में जो विवाद और तनाव की स्थिति बनी है, वह पैदा ही नहीं होती।
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए लिखा कि यूजीसी द्वारा सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में जातिवादी घटनाओं को रोकने के लिए बनाए गए नए नियमों से सामाजिक तनाव का माहौल बन गया है। ऐसे हालात में सुप्रीम कोर्ट का इन नियमों पर रोक लगाना उचित फैसला है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि यूजीसी ने नए नियम लागू करने से पहले सभी पक्षों से बातचीत की होती और जांच समितियों में भी सभी वर्गों को प्राकृतिक न्याय के तहत उचित प्रतिनिधित्व दिया होता, तो यह स्थिति टाली जा सकती थी।
मायावती ने अपने बयान में यह भी साफ किया कि किसी भी नियम को लागू करने से पहले समाज के हर वर्ग को साथ लेना जरूरी होता है, ताकि एकतरफा फैसलों से सामाजिक सौहार्द न बिगड़े।
गौरतलब है कि यूजीसी ने 13 जनवरी को उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नए नियम अधिसूचित किए थे। इन नियमों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई थीं, जिनमें तर्क दिया गया कि नियमों में केवल एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के खिलाफ भेदभाव का उल्लेख है, जबकि सामान्य वर्ग को भेदभाव का शिकार मानने की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं की गई है।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आजादी के 75 वर्षों में देश ने जातिरहित समाज की दिशा में प्रगति की है और सवाल उठता है कि क्या हम अब फिर पीछे की ओर जा रहे हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी करते हुए 13 जनवरी को लागू किए गए नए नियमों पर फिलहाल रोक लगा दी है।

