इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से फैल रही बीमारी और मौतों को लेकर कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अधिकारियों के साथ समीक्षा की। मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर लंबित टेंडर पूरे कर दिए गए हैं, खासकर भागीरथपुरा क्षेत्र के। पानी की समस्या को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
स्वास्थ्य स्थिति पर कहा कि करीब 1400 लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 200 को भर्ती करना पड़ा। आईसीयू में कोई भी मरीज डेंजर जोन में नहीं है। इलाज की गुणवत्ता और समय पर उपचार सरकार की प्राथमिकता है। सभी अस्पतालों में अधिकारी तैनात हैं और हेल्प डेस्क भी बनाई जा रही है।
पाइपलाइन में 60 प्रतिशत बदलाव हो चुका है, बाकी टेंडर हो चुके हैं। लीकेज की जांच और पानी के रैंडम सैंपल लिए जाएंगे। मौतों के आंकड़ों को लेकर भ्रम है, डॉक्टरों के अनुसार कुछ मौतें नेचुरल हैं, लेकिन पूरी जांच होगी। प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि आपदा के वक्त राजनीति नहीं होनी चाहिए और जरूरत पड़ी तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी होगी। नर्मदा का पानी सप्लाई शुरू हो चुका है, लेकिन पीने के लिए उपयोग न करने की लगातार सलाह दी जा रही है।
भोपाल में कांग्रेस ने मंत्री के सरकारी आवास के बाहर प्रदर्शन किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि स्वच्छता के दावे के बावजूद इंदौर में साफ पानी उपलब्ध नहीं है। शहर में कई जगह ‘मौत का पानी’ लिखे पोस्टर चिपकाए गए हैं। कांग्रेस ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

