इंदौर में देर रात बना 66वां ग्रीन कॉरिडोर, ब्रेन डेड युवक के अंगों से कई मरीजों को मिली नई जिंदगी

इंदौर। मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में देर रात एक बार फिर इंसानियत की मिसाल देखने को मिली, जब 66वां ग्रीन कॉरिडोर बनाकर ब्रेन डेड युवक के अंग जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाए गए। खरगोन निवासी विजय जायसवाल के अंगदान से कई लोगों को नई जिंदगी मिली।

सड़क हादसे के बाद विजय जायसवाल को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इस कठिन घड़ी में परिवार ने बड़ा निर्णय लेते हुए अंगदान की सहमति दी। पत्नी, भाई और बेटे ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए दूसरों की जिंदगी बचाने का संकल्प लिया।

इसके बाद जूपिटर अस्पताल से एयरपोर्ट तक विशेष ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। रात 10 बजकर 37 मिनट पर अंग लेकर टीम अस्पताल से रवाना हुई और करीब 1 बजकर 52 मिनट पर एयरपोर्ट पहुंची। हृदय को विमान के जरिए अहमदाबाद भेजा गया, जहां एक जरूरतमंद मरीज को प्रत्यारोपित किया गया।

वहीं किडनी और लिवर का ट्रांसप्लांट इंदौर में ही किया गया। एक किडनी चोइथराम अस्पताल और दूसरी जूपिटर अस्पताल में प्रत्यारोपित की गई। चोइथराम अस्पताल तक अंग पहुंचाने के लिए अलग से ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया, जो रात 11 बजकर 15 मिनट पर शुरू हुआ और महज 6 मिनट में पूरा कर लिया गया।

एक परिवार के साहसिक फैसले और प्रशासन की तत्परता से कई घरों में उम्मीद की नई किरण जली है। यह ग्रीन कॉरिडोर सिर्फ एक रास्ता नहीं था, बल्कि कई जिंदगियों तक पहुंचती उम्मीद की डोर बन गया।

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