इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर की ऐतिहासिक धरोहर राजवाड़ा एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है, जहां सामाजिक कार्यक्रम की आड़ में दरबार हॉल में डिनर आयोजन किए जाने से सुरक्षा मानकों और अनुमति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह पूरा परिसर पुरातत्व विभाग के अंतर्गत आता है, जहां खाने-पीने और खाना बनाने पर सख्त प्रतिबंध है, इसके बावजूद नियमों की खुलेआम अनदेखी का मामला सामने आया है।
जानकारी के मुताबिक इंदौर के एक जैन सोशल ग्रुप एलीगेंट ने राजवाड़ा में पपेट शो आयोजित करने की अनुमति ली थी, लेकिन अनुमति की सीमा से बाहर जाकर दरबार हॉल में भोजन परोसा गया। आयोजन के दौरान राजवाड़ा परिसर में गैस सिलेंडर भी लाए गए, जबकि ऐतिहासिक इमारत में खाना बनाना पूरी तरह वर्जित है। गौरतलब है कि राजवाड़ा का हाल ही में करीब 26 करोड़ रुपये की लागत से रिनोवेशन किया गया था, ऐसे में यह लापरवाही गंभीर मानी जा रही है।
इस पूरे मामले को लेकर इंदौर नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष और शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने महापौर पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पुष्यमित्र भार्गव के कार्यकाल में शहर में व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं और राजवाड़ा जैसे ऐतिहासिक स्थल में नियम तोड़कर आयोजन होना बेहद निंदनीय है। चौकसे ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि कांग्रेस इस मामले की शिकायत संभागायुक्त से करेगी और दोषियों पर त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए।
वहीं विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर बिना वैध अनुमति के राजवाड़ा परिसर में कार्यक्रम आयोजित किया गया और खाना बनाने की अनुमति दी गई है, तो संबंधित विभाग और जिम्मेदार लोगों पर उचित कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी। महापौर ने भरोसा दिलाया कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।

