योगी सरकार के दिव्य संदेश में श्रीमद्भगवदगीता की प्रेरणा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव’ में कहा कि श्रीमद्भगवदगीता सिर्फ एक ग्रंथ नहीं, बल्कि भगवान की दिव्य वाणी है, जो जीवन जीने की कला सिखाती है। उन्होंने बताया कि गीता के 18 अध्यायों के 700 श्लोक हर सनातन धर्मावलंबी के लिए जीवन का मंत्र हैं, जो धर्म, कर्तव्य और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। योगी बोले—गीता धर्म से शुरू होती है और उसी के सार पर विराम लेती है, क्योंकि हमारे यहां धर्म सिर्फ उपासना विधि नहीं बल्कि ‘वे ऑफ लाइफ’ माना गया है।

उत्सव में योगी आदित्यनाथ ने ‘धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः’ का श्लोक सुनाते हुए कहा कि दुनिया में कहीं युद्ध का मैदान ‘धर्म क्षेत्र’ नहीं कहलाता, लेकिन भारत ने युद्ध को भी कर्तव्य की भावना से जोड़ा है। अच्छे कर्म को पुण्य और गलत कर्म को पाप मानते हुए हर सनातनी सही राह पर चलने की कोशिश करता है। भारत ने दुनिया को कभी श्रेष्ठता का दावा नहीं किया, बल्कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का संदेश देकर सभी को अपनाने की बात कही है।

सीएम योगी ने कहा कि भारत की भूमि ने “जियो और जीने दो” की प्रेरणा दी है। इसलिए यहाँ का हर क्षेत्र, हर संघर्ष और हर निर्णय कर्तव्य से जुड़ा होता है। उन्होंने कहा कि युद्ध का परिणाम पहले ही तय होता है — जहाँ योगेश्वर कृष्ण हों और जहाँ अर्जुन जैसा धनुर्धर, वहाँ विजय निश्चित है। भारत सदियों से यही मानता आया है कि यतो धर्मस्ततो जयः — यानी जहाँ धर्म होगा वहीं विजय होगी, अधर्म की जीत कभी संभव नहीं।

योगी आदित्यनाथ ने निष्काम कर्म का संदेश देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने बताया है कि कर्तव्य निभाओ, लेकिन फल की इच्छा मत करो। बीज ठीक होगा तो पेड़ फल देगा ही देगा, इसलिए स्वार्थ छोड़कर कर्म करना ही श्रेष्ठ है। उन्होंने आज के दौर का उदाहरण देते हुए कहा—स्वधर्म और कर्तव्य पर चलते हुए मर जाना भी श्रेयस्कर है, लेकिन कर्तव्य से हटकर किसी और के रास्ते पर चलना विनाश का कारण बनता है।

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत का ज़िक्र करते हुए कहा कि संघ का कार्य निष्काम भावना का उदाहरण है—जहाँ न पैसे की राजनीति है, न किसी विदेशी फंडिंग की कहानी। संगठन समाज के सहयोग से खड़ा हुआ है और हर पीड़ित की सेवा को अपना धर्म समझता है, चाहे वह किसी भी जाति, भाषा या मत का हो।

योगी बोले कि कुछ ताकतें भारत की डेमोग्राफी बदलने और समाज को भ्रमित करने के लिए छल का सहारा ले रही हैं, लेकिन ऐसे समय में श्रीमद्भगवदगीता फिर से नई प्रेरणा बनकर सामने आती है। उन्होंने स्वामी ज्ञानानंद द्वारा लिखित ‘जिओ गीता’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह किताब गीता के संदेश को किसान, मजदूर, युवा, सैनिक, छात्र—हर वर्ग तक सरल भाषा में पहुंचाती है।

अंत में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रीमद्भगवदगीता सिर्फ एक जेल की किताब नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के लिए दिव्य मंत्र है। यह जीवन की हर उलझन में मार्गदर्शन देती है और सफलता, शांति और कर्तव्यनिष्ठ जीवन की राह दिखाती है। हर व्यक्ति को इसे अपने जीवन का हिस्सा अवश्य बनाना चाहिए।

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