इंदौर। प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री और इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक एक से विधायक कैलाश विजयवर्गीय एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। बुधवार को एक निजी विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में स्कूली शिक्षा और बच्चों के चरित्र निर्माण पर बोलते हुए उन्होंने ऐसा उदाहरण दे दिया, जिसने राजनीति से लेकर सोशल मीडिया तक हलचल मचा दी।
मंच से संबोधन के दौरान मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि अगर पिता पीडब्ल्यूडी मंत्री हो और बेटे को कपड़े ठेकेदार दिलवाएं, तो ऐसे में बच्चों का चरित्र निर्माण कैसे होगा। उनका यह बयान सामने आते ही कार्यक्रम स्थल से बाहर तक इसकी चर्चा होने लगी। इससे पहले भी इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जलप्रदाय के मामले में मीडिया से बातचीत के दौरान उनके शब्दों को लेकर विवाद खड़ा हो चुका है, जिस पर विपक्ष ने भाषा और मर्यादा पर सवाल उठाए थे।
लगातार विवादों के बीच पारिवारिक शोक के चलते मंत्री कुछ दिनों की छुट्टी पर भी रहे, लेकिन कार्यभार संभालते ही दिया गया यह नया बयान एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। मंत्री का कहना था कि वे उदाहरण के जरिए बच्चों में नैतिकता और ईमानदारी का संदेश देना चाह रहे थे, लेकिन पीडब्ल्यूडी मंत्री जैसे सीधे संदर्भ ने इस बयान को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया।
मंत्री के इस बयान पर पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन वर्मा ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि बाप मिल मजदूर था और बेटा विदेश में पढ़ा, तो फिर इसका चरित्र कैसा माना जाएगा, और साथ ही यह भी कहा कि लगता है कैलाश भेरू हो गया है।
यह पहला मौका नहीं है जब कैलाश विजयवर्गीय अपने बयानों को लेकर विवादों में आए हों। सवाल यही उठता है कि ऐसे उदाहरण समाज को सही संदेश देते हैं या फिर राजनीतिक तूफान खड़ा करने का काम करते हैं। फिलहाल इतना तय है कि यह बयान आने वाले दिनों तक सियासी बहस का बड़ा मुद्दा बना रहेगा।

