शाजापुर। मध्य प्रदेश के सुंदरसी को उज्जैन की तरह धार्मिक नगरी के रूप में जाना जाता है और कालीसिंध नदी के तट पर स्थित यहां का महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर, सुंदरसी अपनी प्राचीन मान्यताओं और अद्भुत बनावट के लिए प्रसिद्ध है, जो उज्जैन से लगभग सत्तर से अस्सी किलोमीटर और शाजापुर जिला मुख्यालय से करीब तीस से पैंतीस किलोमीटर दूर स्थित है।
इतिहास से जुड़ी पुस्तकों और पुरातात्विक उल्लेखों में सुंदरसी के महाकाल मंदिर का जिक्र उज्जैन की तर्ज पर बने एक प्रमुख तीर्थ के रूप में मिलता है और मान्यता है कि राजा विक्रमादित्य ने उज्जैन के बाहर महाकालेश्वर का एक और मंदिर सुंदरसी में स्थापित कराया था, जिससे यह नगरी अवंतिका परंपरा से जुड़ गई।
कहा जाता है कि सम्राट विक्रमादित्य की छोटी बहन सुन्द्राबाई का विवाह सुंदरसी के राजपुत्र कुंवर भगत सिंह से हुआ था और बहन की गहरी श्रद्धा को देखते हुए उज्जैन के प्रमुख तीर्थों की स्थापना सुंदरसी में कराई गई, जिससे कालांतर में यह नगरी अवंतिका के नाम से प्रसिद्ध हुई और सुन्द्राबाई के नाम पर सुंदरगढ़ से होते हुए इसका नाम सुंदरसी पड़ गया।
सुंदरसी के महाकाल मंदिर के गर्भगृह में बना अनूठा कुंड वर्षों से आस्था और रहस्य का केंद्र रहा है, मान्यता है कि इसका मार्ग उज्जैन महाकाल मंदिर तक जाता है, हालांकि मंदिर में लंबे समय से सेवा दे रहे सेवक इस दावे से इनकार करते हैं और बताते हैं कि इसी कुंड के जल से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता था, अब कुंड सूना पड़ा है लेकिन उसकी मान्यताएं आज भी जीवित हैं।
मंदिर के पीछे स्थित सूरज कुंड को लेकर भी रहस्य बना हुआ है, स्थानीय लोगों का कहना है कि इस कुंड में पानी कहां से आता है और क्यों कभी सूखता नहीं, इसका स्रोत आज तक कोई नहीं जान पाया है, वहीं मंदिर परिसर के बाहरी हिस्से में बिखरी प्राचीन देवी-देवताओं की मूर्तियां, हनुमान मंदिर के पास बने बारह ज्योतिर्लिंग और शनि मंदिर के समीप नवग्रह इस स्थान को एक अनोखा धार्मिक और ऐतिहासिक केंद्र बनाते हैं।

