भोपाल। मध्यप्रदेश में गैस सिलेंडर और पेट्रोल-डीजल को लेकर हालात को काबू में रखने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं, जहां आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए अब तक 9 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज की गई है और 2888 एलपीजी सिलेंडर जब्त किए गए हैं, जमाखोरी की शिकायतों पर प्रदेशभर में 2000 से ज्यादा जगहों पर जांच की गई है और लगातार निगरानी जारी है
सरकार का दावा है कि सभी ऑयल कंपनियों के पास पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, लेकिन जमीनी हालात कुछ और कहानी बयां कर रहे हैं, कई जिलों में अचानक मांग बढ़ने से बिक्री 2 से 2.5 गुना तक पहुंच गई है, जिसके चलते कई पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं और कुछ जगहों पर अस्थायी रूप से स्टॉक खत्म होने जैसी स्थिति भी बनी है
बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सप्लाई प्वाइंट्स पर ज्यादा समय तक काम किया जा रहा है, ताकि जल्द से जल्द स्थिति सामान्य हो सके, लेकिन इसी बीच एक और बड़ा झटका पेट्रोल पंप संचालकों को लगा है, जहां पेट्रोलियम कंपनियों ने क्रेडिट पर मिलने वाला फ्यूल बंद कर दिया है
क्रेडिट सुविधा खत्म होने से कई पेट्रोल पंपों पर संकट गहराने लगा है और कुछ पंप सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं, इसको लेकर पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर शिकायत भी की है कि तेल कंपनियां न तो उधारी की सुविधा दे रही हैं और न ही पर्याप्त सप्लाई कर रही हैं
प्रदेश में करीब 4500 पेट्रोल पंप हैं, जिनमें से राजधानी भोपाल में ही लगभग 260 पंप मौजूद हैं, ऐसे में अगर सप्लाई और मांग के बीच संतुलन नहीं बना तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं, फिलहाल प्रशासन सख्ती के साथ जमाखोरी पर कार्रवाई कर रहा है और लोगों से अपील की जा रही है कि घबराकर ज्यादा खरीदारी न करें

