पटना। बिहार में नई सरकार बनते ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने मंत्रियों के साथ पहली कैबिनेट बैठक करके आने वाले वर्षों के लिए बड़े और दूरगामी फैसले ले लिए हैं। मंत्री संतोष सुमन के मुताबिक, अगले 5 साल बिहार में उद्योगों के साल होने वाले हैं। मुख्यमंत्री ने हर घर को रोजगार देने का संकल्प लिया है और यह भी दावा किया है कि 2030 तक बिहार एक विकसित राज्य के रूप में खड़ा होगा।
सचिवालय में हुई इस पहली बैठक में कुल 10 बड़े प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई, जिनका सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था, उद्योग और रोजगार पर पड़ेगा। बैठक के बाद मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बताया कि बिहार में 25 नई चीनी मिलों की स्थापना का फैसला लिया गया है, जबकि बंद पड़ी 9 चीनी मिलों को फिर से शुरू करने की उम्मीद भी जागी है। इससे किसानों को राहत मिलेगी और ग्रामीण इलाकों में रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे।
राज्य में 11 नए टाउनशिप विकसित किए जाएंगे। इसमें 9 प्रमंडलीय मुख्यालयों के साथ-साथ सीतामढ़ी और सोनपुर को भी शामिल किया गया है। यह फैसला उन लोगों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है जो अपने शहरों को आधुनिक और विकसित रूप में देखना चाहते हैं।
इसके साथ ही बिहार को पूर्वी भारत का नया टेक हब बनाने की दिशा में भी बड़ी घोषणा की गई है। डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, मेगा टेक सिटी और फिनटेक सिटी जैसे हाई-टेक प्रोजेक्ट्स को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। इन योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय समिति बनाई जाएगी।
सरकार का लक्ष्य है कि बिहार को ग्लोबल बैक-एंड हब और ग्लोबल वर्कप्लेस के रूप में विकसित किया जाए। इसके अलावा तकनीक को बढ़ावा देने के लिए बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन को भी हरी झंडी दी गई है, जिससे राज्य नई तकनीक की दुनिया में मजबूत पहचान बना सके।
पहली कैबिनेट मीटिंग ने साफ कर दिया है कि नीतीश सरकार इस बार बड़े विजन और मजबूत प्लानिंग के साथ मैदान में उतरी है। बिहार के लोग अब इन सपनों को हकीकत में बदलते देखने का इंतज़ार कर रहे हैं।

