ग्वालियर। मध्यप्रदेश के ग्वालियर हाईकोर्ट ने रेप के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे निलंबित तहसीलदार शत्रुघ्न सिंह चौहान को बड़ी राहत देते हुए उनकी याचिका स्वीकार कर ली है और दर्ज की गई FIR को निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया है। यह मामला पिछले कई महीनों से चर्चा में था, लेकिन कोर्ट के ताज़ा फैसले ने पूरे केस का रुख बदल दिया है।
याचिका में शत्रुघ्न सिंह चौहान ने यह दलील दी थी कि पीड़िता ने विरोधाभासी आरोप लगाए हैं—एक केस में उसने अपने बेटे का जैविक पिता अमित को बताया, जबकि दूसरे केस में उसी बच्चे का पिता मुझे बता दिया गया। हाईकोर्ट ने घटना की टाइमिंग और आरोपों के पैटर्न को देखते हुए कहा कि यह मामला बदला लेने की नीयत से दर्ज कराया गया प्रतीत होता है और इसलिए FIR को जारी रखना न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ होगा।
यह शिकायत 5 जनवरी 2025 को दर्ज हुई थी, जिसमें महिला ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। शिकायत महिला थाना पड़ाव में दर्ज की गई और प्राथमिकी दर्ज होते ही प्रशासन ने तहसीलदार को निलंबित कर दिया था। लेकिन अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद निलंबित अधिकारी को बड़ी कानूनी राहत मिल गई है, जो इस पूरे मामले में एक अहम मोड़ साबित हो सकती है।

