भोपाल। मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया के बाद चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। इस प्रक्रिया में कई विधानसभा क्षेत्रों में मंत्री जितने वोटों से जीते थे, उससे कहीं ज्यादा मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। इसी बीच बीजेपी के वरिष्ठ नेता डॉ हितेश वाजपेयी का नाम भी मतदाता सूची से हटाए जाने का मामला सामने आया है।
बताया जा रहा है कि डॉ हितेश वाजपेयी को अनुपस्थित दर्शाते हुए SIR के तहत मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया। जानकारी के अनुसार उन्होंने स्थान परिवर्तन के लिए निर्धारित फॉर्म-8 ऑनलाइन जमा किया था, जिसके बाद उनका नाम हटाया गया।
SIR के पहले चरण के बाद आंकड़े साफ हो गए हैं और कई विधानसभा क्षेत्रों में जीत के अंतर से कहीं ज्यादा मतदाता कम हुए हैं। ग्वालियर दक्षिण विधानसभा में मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा 2 हजार 536 वोटों से जीते थे, जबकि यहां 56 हजार 552 वोटर कम हो गए। भोपाल की गोविंदपुरा सीट पर मंत्री कृष्णा गौर 1 लाख 6 हजार 668 वोटों से विजयी रहीं, लेकिन 97 हजार 52 मतदाताओं के नाम कट गए।
भोपाल की नरेला विधानसभा में मंत्री विश्वास सारंग 24 हजार 569 वोटों से जीते थे, जबकि यहां 81 हजार 235 वोटर कम हुए। इंदौर विधानसभा एक में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय 57 हजार 939 वोटों से जीते, लेकिन 75 हजार 14 मतदाताओं के नाम सूची से हट गए। वहीं जबेरा विधानसभा में मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी 15 हजार 883 वोटों से जीते थे और यहां करीब 10 हजार वोटरों के नाम काटे गए।
SIR प्रक्रिया के बाद सामने आए इन आंकड़ों ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और मतदाता सूची की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

