एमपी विधानसभा बजट सत्र 2026: भागीरथपुरा मामले पर स्थगन प्रस्ताव को लेकर गरमाई बहस

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र 2026 में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से हुई मौतों का मामला गूंजने वाला है। इस मुद्दे पर आज स्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा होगी। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पहले ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए इस गंभीर मामले पर चर्चा की मांग की थी और अब वे समेत आधा दर्जन से अधिक कांग्रेस विधायक सदन में अपनी बात रखेंगे।

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से कई लोगों की जान चली गई थी। सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुरानी पाइपलाइन बदलने और स्वास्थ्य सुविधाओं की जांच के निर्देश दिए। विधानसभा अध्यक्ष ने भी माना कि नगर निगम की ओर से स्वच्छ पानी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई, जिसके कारण लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा।

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने घटना को बेहद गंभीर और आत्मग्लानि से भरी बताते हुए कहा कि यह पूरे इंदौर के लिए कलंक जैसा है। उन्होंने बताया कि शिकायतों के बावजूद टेंडर प्रक्रिया के बाद समय पर काम नहीं हुआ। मुख्यमंत्री द्वारा गठित कमेटी में कुछ अधिकारी दोषी पाए गए। उन्होंने कहा कि स्वच्छता में देशभर में नंबर वन रहने वाला इंदौर, जिसने स्वच्छ भारत मिशन को संस्कार का रूप दिया, उसके लिए यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है।

कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि भारी मतों से जीतने के बाद जब वे मथुरा जा रहे थे तभी उन्हें घटना की जानकारी मिली और वे तुरंत इंदौर लौट आए। अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ थी, रातोंरात करीब ढाई सौ लोगों को निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया और इलाज मुफ्त करवाया गया। उन्होंने भागीरथपुरा की स्थिति की तुलना मुंबई की धारावी से करते हुए कहा कि हालात बेहद चुनौतीपूर्ण थे। इस दौरान करीब 22 लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी।

उन्होंने कहा कि पूरी प्रशासनिक मशीनरी, मंत्री और अधिकारी मिलकर राहत कार्य में जुटे रहे। डेढ़ सौ से अधिक सामाजिक कार्यकर्ता और पैरामेडिकल स्टाफ इलाज में लगे रहे, लेकिन उन्हें इस बात का दुख है कि जहां लोग जान गंवा चुके थे, वहां कुछ लोग जिंदाबाद-मुर्दाबाद के नारे लगा रहे थे।

सदन में कांग्रेस विधायक भंवरलाल सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि क्या सदन सिर्फ तारीफ के लिए बुलाया गया है। इस पर विजयवर्गीय ने जवाब दिया कि जो जरूरत है वही करना चाहिए, वे तीन रात तक सोए नहीं और मौके पर डटे रहे। उन्होंने माना कि संसाधन और बजट होने के बावजूद समय पर काम न होने से यह त्रासदी हुई। अब पूरे मध्यप्रदेश में कंट्रोल रूम बनाकर दूषित पानी के मामलों पर कार्ययोजना तैयार की गई है और पुरानी पाइपलाइनों को बदला जा रहा है।

उन्होंने कहा कि नर्मदा परियोजना के चौथे चरण से इंदौर में अगले 20 साल तक पानी की समस्या खत्म हो जाएगी। इंदौर पर जो दाग लगा है, उससे उबरकर शहर फिर नंबर वन बनेगा। उन्होंने कहा कि हम जख्मों की नुमाइश नहीं, बल्कि उन्हें भरने की कोशिश कर रहे हैं। राजनीति से ऊपर उठकर काम करने की जरूरत है, क्योंकि हमें गिरकर फिर से उठना आता है।

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