भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में सहारा से जुड़े निवेशकों का मामला जोरदार तरीके से उठा, जहां सरकार ने स्वीकार किया कि प्रदेश के निवेशकों के कुल 6 हजार 689 करोड़ रुपये फंसे हुए थे, जिनमें से अब तक केवल 355 करोड़ रुपये ही वापस हो सके हैं। विपक्ष ने इसे महज पांच प्रतिशत रिकवरी बताते हुए सरकार पर सवाल खड़े किए।
यह मुद्दा कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने उठाया, जिस पर राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने जवाब देते हुए बताया कि चार एफआईआर दर्ज की गई हैं। हालांकि जयवर्धन सिंह ने दावा किया कि पिछले छह वर्षों में 123 एफआईआर दर्ज हुईं और कई मामले अब भी लंबित हैं। मंत्री ने कहा कि अधिकांश एफआईआर मुरैना में दर्ज कर मुख्य प्रकरण में मर्ज की गई हैं और मामला उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत आगे बढ़ रहा है।
सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि सहारा में बड़ी संख्या में छोटे निवेशकों ने अपनी गाढ़ी कमाई लगाई थी। अब तक 355 करोड़ रुपये की राशि निवेशकों को वितरित की जा चुकी है, जबकि शेष राशि की वसूली की प्रक्रिया जारी है।
रिकवरी की आगे की योजना पर सवाल उठाते हुए जयवर्धन सिंह ने सरकार से ठोस रोडमैप मांगा। इस पर संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मामला न्यायिक प्रक्रिया में है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ही कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि शासन की कुछ कानूनी सीमाएं हैं और अंतिम निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुरूप ही होंगे।

