एमपी में स्वावलंबी गौशालाओं की बड़ी योजना, ऑस्ट्रेलिया-दुबई की कंपनियां भी मैदान में

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के आठवें दिन सदन में निराश्रित गोवंश का मुद्दा गरमा गया। कांग्रेस विधायक अजय सिंह राहुल ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए सरकार को घेरा और कहा कि प्रदेश में आवारा मवेशियों की वजह से किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं, नेशनल हाईवे पर हादसे बढ़ रहे हैं और आमजन की जान-माल पर खतरा बना हुआ है। उन्होंने बंद पड़ी गौशालाओं का आंकड़ा सार्वजनिक करने और ठोस कार्रवाई की मांग की।

जवाब में पशुपालन मंत्री लखन सिंह पटेल ने कहा कि सरकार इस समस्या को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने बताया कि नगरीय प्रशासन द्वारा सड़कों पर घूमने वाले पशुओं के मालिकों पर 25 लाख रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगाया जा चुका है और वर्तमान में प्रदेश की गौशालाओं में 4 लाख से अधिक मवेशी आश्रित हैं। मंत्री ने दावा किया कि नेशनल और स्टेट हाईवे पर दुर्घटनाएं कम करने के लिए पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है और जहां पशु अधिक एकत्र होते हैं, वहां स्वावलंबी और हाईटेक गौशालाएं विकसित की जा रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि ऑस्ट्रेलिया और दुबई की कंपनियों ने इन परियोजनाओं में रुचि दिखाते हुए टेंडर डाले हैं, जिससे गौशालाएं आत्मनिर्भर बन सकेंगी। सरकार का लक्ष्य है कि अगले दो वर्षों में 10 लाख निराश्रित पशुओं को गौशालाओं में आश्रय दिया जा सके।

मंत्री ने कहा कि यह देश की पहली ऐसी योजना है, जो गौ संरक्षण के साथ गौशालाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने पर केंद्रित है। वहीं विधायक अजय सिंह राहुल ने किसानों की फसल सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने पर जोर दिया।

बहस के दौरान विधायक हेमंत कटारे ने भी कहा कि सदन में अन्य विषयों की तुलना में गौ विषय पर कम समय मिलता है और विदेशी कंपनियों की भूमिका पर सवाल उठाए। इस पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने स्पष्ट कहा कि सड़क पर गौ होना गौ की गलती नहीं, बल्कि यह मानवजनित समस्या है। उन्होंने कहा कि प्रोफेशनल और सेवादायी गौशालाएं ही इसका स्थायी समाधान हैं और इस दिशा में अभी काफी काम किया जाना बाकी है।

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