कचरे से बनेगी एमपी की पहली 10 लेन सुपरहाईवे, हरित तकनीक से बदलेगा विकास का चेहरा

भोपाल। भोपाल के आदमपुर खंती में सालों से जमा कचरा अब प्रदेश के विकास की नई कहानी लिखने जा रहा है, National Highways Authority of India यानी NHAI की पहल से यही कचरा अब मजबूत नेशनल हाईवे की नींव बनेगा और मध्यप्रदेश को उसकी पहली 10 लेन सुपरहाईवे मिलने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

इस योजना के तहत अयोध्या बायपास के करीब 16 किलोमीटर लंबे चौड़ीकरण कार्य में कचरे का उपयोग किया जा रहा है, वहीं भोपाल से रायसेन होते हुए सागर तक NH-146 के निर्माण में भी इसी पुनर्चक्रित मटेरियल को शामिल किया गया है, जिससे हरित और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिल रहा है।

आदमपुर खंती से करीब 10 लाख मीट्रिक टन ठोस कचरे का इस्तेमाल किया जाएगा, लेकिन इससे पहले हर सैंपल की लैब में जांच कर गुणवत्ता और सुरक्षा के सभी मानकों को सुनिश्चित किया गया है, ताकि सड़क मजबूत और लंबे समय तक टिकाऊ बनी रहे।

यह पहल सिर्फ सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों के जीवन में भी बड़ा बदलाव लाएगी, जहां पहले बदबू, धुआं और प्रदूषण से लोग परेशान थे, अब वहीं कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण होगा और वातावरण साफ व सुरक्षित बनेगा।

कचरे के उपयोग की प्रक्रिया में पहले उसकी छंटाई की जाती है, फिर प्लास्टिक, धातु, कांच और मिट्टी जैसे हिस्सों को अलग किया जाता है, इसके बाद प्रोसेसिंग कर प्लास्टिक को छोटे टुकड़ों में बदला जाता है और इनर्ट मटेरियल को निर्माण के लिए तैयार किया जाता है।

इसके बाद प्लास्टिक को गर्म डामर में मिलाकर मजबूत बिटुमिनस मिक्स तैयार किया जाता है, जिससे सड़क की पकड़ मजबूत होती है, दरारें कम पड़ती हैं और पानी का असर भी कम होता है, वहीं मिट्टी जैसे कचरे का उपयोग सड़क की निचली परत में किया जाता है, जिससे उसकी मजबूती और बढ़ जाती है।

इस पूरी प्रक्रिया में हर चरण पर गुणवत्ता की जांच की जाती है, ताकि सड़क सुरक्षा और टिकाऊपन के सभी मानकों पर खरी उतरे।

यह पहल ‘Reduce, Reuse, Recycle’ यानी 3R सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें कचरे को खत्म करने के बजाय उसे संसाधन में बदलने पर जोर दिया जा रहा है, और यही मॉडल अब देशभर में तेजी से अपनाया जा रहा है।

पहले भी दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और गुरुग्राम जैसे शहरों में इस तकनीक का सफल इस्तेमाल हो चुका है, जिससे यह साबित हो चुका है कि कचरे से बनी सड़कें मजबूत और टिकाऊ होती हैं।

अब आदमपुर खंती, जो कभी प्रदूषण की बड़ी समस्या थी, वही जगह एक उदाहरण बन रही है कि कैसे कचरे को संसाधन में बदलकर विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाया जा सकता है, और यही पहल भविष्य के हरित और आधुनिक भारत की दिशा तय कर रही है।

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