मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद अब प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से गंदे और बदबूदार पानी की शिकायतें सामने आने लगी हैं। मुरैना में नलों से गोबर जैसे रंग का पानी निकलने का आरोप है, जबलपुर में कांग्रेस घर-घर जाकर पानी के सैंपल की जांच कर रही है और इंदौर के भागीरथपुरा में लोग मजबूरी में 10 हजार रुपये खर्च कर अपने घरों में आरओ लगवा रहे हैं, जिससे आम लोगों का घरेलू बजट बिगड़ता जा रहा है।
इंदौर की घटना के बाद मुरैना जिला प्रशासन भी अलर्ट मोड में आ गया है। कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ सोमवार को शहर के अलग-अलग इलाकों में पेयजल की गुणवत्ता और पाइपलाइनों की स्थिति देखने पहुंचे। जहां-जहां कलेक्टर पहुंचे, वहां नलों से दूषित और बदबूदार पानी आने की शिकायतें मिलीं। कहीं फूटी पाइपलाइन मिली तो कहीं पानी के साथ सीवर और गोबर जैसी गंध आने की बात सामने आई।
कलेक्टर सबसे पहले पुलिस लाइन और लक्ष्मण तलैया क्षेत्र पहुंचे, जहां खुले नालों के बीच से गुजर रही फूटी पाइपलाइन दिखाई दी। रहवासियों ने बताया कि इसी वजह से नलों में गंदा पानी आ रहा है। इसके बाद वार्ड 37 वनखंडी रोड और कैप्टन वाली गली में पहुंचते ही हर घर से दूषित पानी की शिकायतें सामने आईं।
इलाके की बुजुर्ग महिला प्रेमाबाई शर्मा ने कलेक्टर को बेटे की तरह संबोधित करते हुए कहा कि नलों से इतना गंदा और बदबूदार पानी आता है कि भगवान की पूजा तक नहीं कर पा रहे हैं। पीने के लिए मजबूरी में बाजार से पानी खरीदना पड़ रहा है।
स्थानीय युवक सोनू ने बताया कि जब नल से पानी शुरू होता है तो पहले गोबर जैसे रंग का पानी निकलता है, जिसमें तेज बदबू होती है। कुछ देर बाद पानी दिखने में साफ हो जाता है, लेकिन उसमें छोटे-छोटे कण तैरते रहते हैं, जिससे कुल्ला करने का भी मन नहीं करता।
लता खटीक ने अपने घर की पानी की टंकी दिखाते हुए बताया कि कई दिनों से पूरे इलाके में बदबूदार पानी आ रहा है। नहाने के लिए तो यही पानी इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन पीने के लिए फिल्टर पानी खरीदना पड़ रहा है।
इसके बाद कलेक्टर सिंघल बस्ती पहुंचे, जहां लोगों ने सीवर लाइन के पास फूटी पाइपलाइन दिखाई। महिलाओं ने बताया कि रोज पानी की सप्लाई नहीं हो रही और जब आती है तो कई बार गंदा पानी निकलता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने निगमायुक्त को नालों की सफाई कराने और नालों के बीच से गुजर रही पानी की पाइपलाइनों को हटाने के निर्देश दिए हैं।
प्रदेश में एक के बाद एक सामने आ रही इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि मध्य प्रदेश का जल अब निर्मल नहीं रहा और अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और भी भयावह हो सकते हैं।

