केंद्र सरकार ने आज से देश में चार नई श्रम संहिताएँ लागू कर दी हैं, जो भारत के करोड़ों कामगारों की जिंदगी में एक बड़ा बदलाव लाने वाली हैं। सरकार का लक्ष्य था कि पुराने और जटिल श्रम कानूनों को आसान, प्रभावी और समय के अनुसार ढाला जाए—और इन्हीं संहिताओं के साथ यह नया अध्याय शुरू हो चुका है। इन नए नियमों से कर्मचारियों को बेहतर वेतन, समय पर भुगतान, सामाजिक सुरक्षा, सुरक्षित कार्य वातावरण और ओवरटाइम के दोगुने भुगतान जैसी कई बड़ी सुविधाएँ सीधे तौर पर मिलेंगी। काम करने वाली कंपनियों और संस्थानों को भी अब इन नए मानकों के अनुसार खुद को अपडेट करना होगा, क्योंकि यह नियम हर सेक्टर में लागू होंगे।
इसी बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस फैसले का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ये श्रम संहिताएँ देश के कामगारों की सुरक्षा, सम्मान और जीवन स्तर को मजबूत करने का ऐतिहासिक कदम हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा कि यह निर्णय श्रमिकों के लिए समान अवसर, सुरक्षित कार्य स्थितियाँ और बेहतर सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, साथ ही देश की उत्पादकता, रोजगार सृजन और ‘विकसित भारत’ के सपने को और गति देगा।
नई श्रम संहिताओं में महिलाओं के लिए सबसे बड़े बदलावों में समान काम के लिए समान वेतन की गारंटी, नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति, और शिकायत निवारण समितियों में महिलाओं की अनिवार्य भागीदारी शामिल है। इतना ही नहीं, महिलाओं के परिवार की परिभाषा में सास-ससुर को भी जोड़ दिया गया है, जिससे डिपेंडेंट कवरेज और अधिक समावेशी बनाया जा सके।
डिजिटल, ऑडियो-विजुअल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े पत्रकारों, डबिंग आर्टिस्ट, तकनीकी स्टाफ और स्टंट पर्सन को भी अब पूरी तरह इन नियमों का लाभ मिलेगा। हर कामगार को लिखित नियुक्तिपत्र देना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसमें वेतन, पदनाम और सभी अधिकार स्पष्ट रूप से लिखे होंगे। वेतन समय पर देना अब सख्ती से अनिवार्य है, और ओवरटाइम सिर्फ सहमति से होगा, लेकिन भुगतान हमेशा साधारण मजदूरी से कम से कम दोगुना मिलेगा।
आईटी और आईटीईएस सेक्टर के कर्मचारियों के लिए भी बड़े बदलाव किए गए हैं। हर महीने की 7 तारीख तक वेतन का भुगतान अनिवार्य होगा। महिलाओं को भी नाइट शिफ्ट में काम करने का विकल्प मिलेगा, जिससे बेहतर वेतन पाने के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही विवादों, भेदभाव और वेतन से जुड़ी परेशानियों का जल्दी समाधान सुनिश्चित किया गया है, और फिक्स्ड-टर्म रोजगार के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा को पक्का किया गया है।
नई श्रम संहिताएँ सिर्फ नियमों का बदलाव नहीं—यह भारत के कामगार वर्ग को मजबूत करने, उद्योग जगत में विश्वास बढ़ाने और देश को तेज गति से विकास की ओर ले जाने वाला कदम है। यह एक ऐसा निर्णय है जो आने वाले वर्षों में भारत के श्रम क्षेत्र की तस्वीर ही बदल देगा।

