इंदौर। इंदौर केंद्रीय जेल परिसर में 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर 9 बंदियों को अच्छे आचरण और राज्य शासन के निर्देशानुसार रिहा किया गया। जेल के बाहर परिवारों की भीड़ उत्सुकता और खुशी के साथ इंतजार करती दिखी। जैसे ही बंदी बाहर आए, परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। यह मिलन सालों की दूरी और इंतजार के बाद हुआ, जिसने हर किसी का दिल छू लिया।
रिहा हुए बंदियों ने सार्वजनिक रूप से शपथ ली कि वे अब अपराध से दूर रहेंगे और समाज की मुख्यधारा में ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ जीवन बिताएंगे। उन्होंने शासन और जेल प्रशासन का धन्यवाद करते हुए इस मौके को अपनी जिंदगी की नई शुरुआत बताया।
इस अवसर पर पुलिस अधिकारियों ने भी बंदियों को कानून का पालन करने, परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने और स्वावलंबी जीवन जीने का संदेश दिया। यह रिहाई न केवल 9 परिवारों के लिए खुशियों का अवसर बनी, बल्कि सुधार और पुनर्वास की भावना को भी मजबूत किया।
जेल अधीक्षक अलका सोनकर ने बताया कि यह सभी बंदी आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे, लेकिन अच्छे व्यवहार और जेल में सहयोग के कारण शासन की ओर से इन्हें माफी दी गई है। इनमें से एक शंकर बाबा थे, जो हत्या के मामले में बंद थे। जेल में वे भजन, ध्यान और ईश्वर की पूजा में लीन रहे। अब वे भगवाधारण करके जेल से बाहर निकले हैं और उनका कहना है कि वे भगवान की आराधना करते रहेंगे और अपने जीवन में नई राह अपनाएंगे।
इस भावुक मौके ने साबित कर दिया कि सुधार और पुनर्वास की प्रक्रिया से ही समाज में सकारात्मक बदलाव आ सकता है और हर व्यक्ति को नई शुरुआत का मौका मिलना चाहिए।

