ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इन दिनों “गौ-प्रतिष्ठा महायुद्ध” अभियान के तहत पदयात्रा कर रहे हैं। इसी यात्रा के दौरान वे वाराणसी से निकलकर रायबरेली पहुंचे, जहां उन्होंने रात्रि प्रवास किया और गौ रक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अब गोहत्या के खिलाफ सख्त कदम उठाने की जरूरत है और इसे उन्होंने ‘धर्मयुद्ध’ बताते हुए हिंदू समाज को जागरूक और सचेत रहने का संदेश दिया।
शंकराचार्य ने अपने संबोधन में प्रयागराज के माघ मेले की एक घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वहां बटुकों यानी बाल ब्रह्मचारियों का अपमान किया गया, उनकी शिखा पकड़कर उन्हें खींचा गया और पूरे देश ने यह दृश्य देखा। उनके अनुसार यह केवल किसी व्यक्ति का अपमान नहीं बल्कि सनातन परंपरा और ब्राह्मण-बटुकों की गरिमा पर सीधा हमला था, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
गो रक्षा के मुद्दे पर उन्होंने काफी आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि अब गौ माता की रक्षा के लिए धर्मयुद्ध की जरूरत है और हिंदू समाज अब चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार पर भी आरोप लगाया कि गो रक्षा के मामले में गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
शंकराचार्य ने कहा कि काशी से रायबरेली तक अब गौ रक्षा का संदेश गूंजेगा और इस अभियान को और मजबूत किया जाएगा। इसी कड़ी में 11 मार्च को लखनऊ में संतों और गौभक्तों का एक बड़ा समागम आयोजित किया जा रहा है। इस समागम का उद्देश्य गौ माता को ‘राजमाता’ का दर्जा दिलाने, गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और बीफ के निर्यात को पूरी तरह रोकने की मांग को मजबूत करना बताया जा रहा है।
इस बयान के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की पदयात्रा और उनके अभियान को लेकर धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

