मकर संक्रांति पर सेठानी घाट समेत नर्मदा तटों पर उमड़ी श्रद्धा की लहर, कड़ाके की ठंड में गूंजे हर हर नर्मदे के जयकारे

नर्मदापुरम। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सनातन संस्कृति के इस शुभ पर्व पर सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही उत्तरायण का शुभ काल शुरू होता है और इसी आस्था के साथ श्रद्धालु नर्मदा स्नान के लिए घाटों पर पहुंचे।

नर्मदापुरम के प्रसिद्ध सेठानी घाट पर सुबह चार बजे से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। नर्मदापुरम के साथ-साथ बैतूल, छिंदवाड़ा, भोपाल और आसपास के जिलों से हजारों श्रद्धालु कड़कड़ाती ठंड के बावजूद नर्मदा में आस्था की डुबकी लगाने पहुंचे। घाट पर हर हर नर्मदे के जयकारे गूंजते रहे और पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा।

मकर संक्रांति के अवसर पर स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने सत्यनारायण भगवान की कथा की, खिचड़ी और तिल का दान किया। शास्त्रों के अनुसार इस दिन तिल, खिचड़ी, वस्त्र और कंबल दान का विशेष महत्व माना जाता है, इसी परंपरा का पालन करते हुए श्रद्धालुओं ने दरिद्र नारायण को दान भी किया।

इसी तरह मकर संक्रांति पर नेमावर के पेढ़ी घाट, सिद्धनाथ घाट और नागर घाट पर भी सुबह से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। देवास, हरदा, सीहोर सहित कई जिलों से लोग ठंड के बीच नर्मदा तट पहुंचे और आस्था की डुबकी लगाई। घाटों पर हर हर नर्मदे के जयघोष के साथ भक्तों ने स्नान, दान और सूर्य उपासना की।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव को लाल वस्त्र, गेहूं, गुड़, मसूर दाल, तांबा, नारियल और दक्षिणा अर्पित करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी विश्वास के साथ नर्मदा तटों पर श्रद्धा, भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला।

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