कागजी ढाल या तस्करी की चाल? मऊगंज में 28 गौवंशों से भरी तीन पिकअप जब्त, खाकी और पंचायत के खिलाफ सवाल उठे

मऊगंज। रीवा और मऊगंज जिले की सीमा पर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन के दावों और कागजी दस्तावेजों की पोल खोल दी है। लौर थाना क्षेत्र के पटपरा तिराहे पर ग्रामीणों ने अपनी सूझबूझ से तीन पिकअप गाड़ियां पकड़ीं, जिनमें कुल 28 गौवंश क्रूरता से भरे हुए थे। इतनी भीड़ थी कि गौवंशों की चीखें भी बाहर नहीं आ पा रही थीं।

लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात वे दस्तावेज थे जो आरोपियों ने पेश किए। एक जिले के सरपंच ने दूसरे जिले की पंचायत के लिए पत्र लिखा था, जबकि जिस पंचायत का नाम था उसके सरपंच को इसका कोई पता तक नहीं था। यह पूरा मामला एक बड़े खेल का हिस्सा लग रहा है, जिसका मास्टरमाइंड अभी अनजान है।

तीन पिकअप गाड़ियों में निर्दयता से भरे गए ये 28 बेजुबान पशु उस क्रूरता की गवाही दे रहे हैं जो कागजों के पीछे छिपी हुई है। आरोपी महेंद्र गुप्ता, अंकित साकेत और सुरेश साहू मनगवां क्षेत्र के निवासी हैं। पुलिस ने पशु क्रूरता के तहत मामला दर्ज किया है, लेकिन असली कहानी तो उन दस्तावेजों में छुपी है जो जांच में सामने आए।

मऊगंज की आमोखर ग्राम पंचायत के सरपंच ने 26 जनवरी को तिवरीगवां पंचायत से 70 गौवंशों की मांग की एक पत्र जारी किया था। लेकिन जब तिवरीगवां के सरपंच से बात की गई तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया कि उन्होंने ऐसा कोई पत्र नहीं लिखा और उन्हें इस बारे में कुछ पता भी नहीं है।

आरोपियों ने रीवा जिला प्रशासन का एक पुराना पत्र भी दिखाया, जो वर्तमान परिवहन से संबंधित नहीं था। आमोखर गौशाला की क्षमता 400 पशु है, जबकि वहां पहले से 500 से अधिक पशु खराब हालत में हैं, फिर दूसरे जिले से पशु क्यों लाए जा रहे थे? यह सब गौ-सेवा नहीं, बल्कि संगठित गौ-तस्करी का संकेत लगता है।

ग्रामीणों की सजगता से यह बड़ा रैकेट उजागर हुआ। आशुतोष मिश्रा और गोलू गौतम जैसे युवाओं ने वाहन को रोककर पुलिस को सूचना दी, पर पुलिस की कार्रवाई फिलहाल केवल पशु क्रूरता की मामूली धाराओं तक सीमित नजर आ रही है।

क्या वरिष्ठ अधिकारी इस मामले की गहराई से जांच करेंगे? क्या बिना अधिकार क्षेत्र के पत्राचार करने वाले सरपंचों पर कार्रवाई होगी? एसडीओपी सचि पाठक ने वैधानिक कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन सवाल अब भी अनसुलझे हैं।

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