भोपाल में पालक महासंघ का हल्ला बोल, निजी स्कूलों की मनमानी फीस के खिलाफ DEO ऑफिस का घेराव और शिक्षा माफिया पर जमकर नारेबाजी

भोपाल। राजधानी भोपाल में निजी स्कूलों की बढ़ती फीस और मनमानी वसूली को लेकर अभिभावकों का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा। पालक महासंघ के बैनर तले बड़ी संख्या में अभिभावक जिला शिक्षा अधिकारी यानी डीईओ कार्यालय पहुंचे और शिक्षा माफिया के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने डीईओ ऑफिस का घेराव करते हुए जमकर नारेबाजी की और निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने की मांग उठाई।

अभिभावकों का आरोप है कि शहर के कई निजी स्कूल मनमाने तरीके से फीस बढ़ा रहे हैं और बस फीस, किताबों तथा अन्य शुल्क के नाम पर भारी रकम वसूल रहे हैं। उनका कहना है कि इन सब पर कोई ठोस नियम लागू नहीं किया जा रहा, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।

पालक महासंघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि शिक्षा माफिया और निजी स्कूल संचालकों के दबाव के कारण जिला शिक्षा अधिकारी कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद विभाग की ओर से कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया, जिससे स्कूल संचालकों के हौसले और बढ़ गए हैं।

प्रदर्शन के दौरान पालक महासंघ के प्रतिनिधियों ने डीईओ को ज्ञापन सौंपने की कोशिश भी की, लेकिन आरोप है कि अधिकारी ने ज्ञापन लेने से इनकार कर दिया और दफ्तर छोड़कर चले गए। इस घटना के बाद प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों का गुस्सा और बढ़ गया और उन्होंने शिक्षा विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शन में शामिल अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूलों की मनमानी के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ रहा है। कई परिवार बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने में मुश्किल महसूस कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद विभाग की ओर से कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही।

पालक महासंघ ने मांग की है कि निजी स्कूलों द्वारा की जा रही फीस वृद्धि पर तुरंत रोक लगाई जाए। साथ ही फीस, बस चार्ज और किताबों की कीमतों के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए ताकि अभिभावकों पर मनमाना आर्थिक बोझ न डाला जा सके। इसके अलावा शिक्षा माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए दोषी स्कूलों पर जुर्माना लगाने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की गई है।

इस प्रदर्शन के बाद अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन अभिभावकों की इन मांगों पर क्या कदम उठाता है और निजी स्कूलों की फीस को लेकर कोई ठोस फैसला लेता है या नहीं।

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