इंदौर दूषित पानी कांड पर PCC चीफ जीतू पटवारी का हमला, बोले मंत्री विजयवर्गीय का बयान शर्मनाक

भोपाल। इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का तीखा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बयान पूरे प्रदेश को शर्मसार करने वाला है और सरकार सच्चाई छिपाने में लगी हुई है। जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार और नगर निगम दोनों ही इन मौतों के जिम्मेदार हैं और वास्तविक आंकड़े जनता से छुपाए जा रहे हैं।

जीतू पटवारी ने दावा किया कि इंदौर में अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें एक दुधमुंहा बच्चा भी शामिल है। उन्होंने कहा कि यह सरकार की घोर लापरवाही का नतीजा है और इससे पहले कफ सिरप कांड में भी आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे साफ है कि सरकार गंभीर मामलों को दबाने की आदत बना चुकी है।

उन्होंने कहा कि 13 मौतों के बाद भी सरकार जांच की बात कर रही है, यह बेहद हैरान करने वाला है। जिस इंदौर शहर ने देश को स्वच्छता का तमगा दिलाया, उसी शहर को सरकार ने जहर पिला दिया। जीतू पटवारी ने कहा कि कैलाश विजयवर्गीय को शर्म आनी चाहिए, यही बीजेपी का चाल, चरित्र और चेहरा है और सत्ता का अहंकार मंत्री के शब्दों में साफ झलक रहा है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस ने पूर्व नगरीय प्रशासन मंत्रियों की एक जांच टीम बनाई है और जिनकी वजह से 13 लोगों की जान गई है, उन पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कांग्रेस यह मांग कर रही है तो उसके कार्यकर्ताओं पर डंडे बरसाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंत्री 25 लाख मुआवजे की बात करते हैं, लेकिन खुद दो लाख रुपये का चेक थमा देते हैं, यह जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।

जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस की मांग है कि मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए और इलाज के नाम पर पीड़ित परिवारों को परेशान न किया जाए। उन्होंने कहा कि इंदौर को एक प्रभारी मंत्री तक नहीं दिया गया और मौत के इस तांडव का एक बड़ा जिम्मेदार वही खाली कुर्सी है। उन्होंने सरकार से अपील की कि इंदौर को अपने कब्जे से मुक्त किया जाए।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कैलाश विजयवर्गीय को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। जीतू पटवारी ने कहा कि वह इस मामले में राजनीति नहीं करना चाहते, बल्कि जनता और पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को समय रहते हालात संभालने चाहिए थे, लेकिन वह मौत के आंकड़े दबाने में लगी रही, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

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