भोपाल। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होने वाला नवसंवत्सर भारतीय संस्कृति, विज्ञान और प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली का प्रतीक है और इस वर्ष विक्रम संवत् 2083 का शुभारंभ हुआ है, जो खास तौर पर मध्य प्रदेश के लिए गर्व का विषय है क्योंकि भारतीय कालगणना की यह परंपरा उज्जयिनी से जुड़ी मानी जाती है।
सम्राट Vikramaditya के राज्याभिषेक से शुरू हुआ विक्रम संवत भारतीय संस्कृति, न्याय और सुशासन का प्रतीक है, जिनके आदर्श आज भी शासन-प्रशासन के लिए प्रेरणा माने जाते हैं और जिनकी महानता का वर्णन ‘सिंहासन बत्तीसी’ जैसी कथाओं में भी मिलता है।
इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश में ‘विक्रमोत्सव-2026’ का आयोजन किया जा रहा है, जो 12 फरवरी से 30 जून तक चलेगा और इसमें सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और बौद्धिक कार्यक्रमों के जरिए सम्राट विक्रमादित्य के जीवन और आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।
उज्जैन, जिसे बाबा महाकाल की नगरी कहा जाता है, प्राचीन समय से ही खगोल विज्ञान, कालगणना और आध्यात्मिक साधना का प्रमुख केंद्र रहा है और इसी गौरव को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi के मार्गदर्शन में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का पुनर्स्थापन भी किया गया है, जो भारतीय समय गणना की परंपरा को आधुनिक युग से जोड़ता है।
भारतीय नववर्ष प्रकृति के नवोदय का पर्व है, जब चारों ओर नई ऊर्जा, नई शुरुआत और नवसृजन का वातावरण बनता है, यही कारण है कि देशभर में इसे अलग-अलग नामों जैसे गुड़ी पड़वा, उगादि, चैती चांद और नवरोज के रूप में मनाया जाता है और इसी दिन से चैत्र नवरात्र की शुरुआत भी होती है।
मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने नवसंवत्सर को विकास और जनकल्याण के नए संकल्पों से जोड़ते हुए इस वर्ष को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया है, क्योंकि कृषि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों को मजबूत बनाना ही विकास की सबसे बड़ी कुंजी है।
सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं और कृषि आधारित उद्योगों के जरिए किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके साथ ही प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों जैसे ओंकारेश्वर, उज्जैन और मैहर के विकास पर भी तेजी से काम किया जा रहा है और वर्ष 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ की तैयारियां भी जारी हैं, ताकि आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सके।
नवसंवत्सर के अवसर पर जल संरक्षण को भी विशेष महत्व देते हुए “जल गंगा संवर्धन अभियान” की शुरुआत की गई है, जो उज्जैन के शिप्रा तट से शुरू होकर पूरे प्रदेश में जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन का संदेश देगा।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे इस अभियान को जन आंदोलन बनाएं और नववर्ष के इस अवसर पर विकसित मध्यप्रदेश और विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लें, ताकि आने वाला समय प्रगति, समृद्धि और नई उपलब्धियों से भरा हो।

