भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2025-26 का पेपरलेस बजट पेश होते ही प्रदेश की राजनीति गरमा गई। बजट पेश होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इसे देश का पहला रोलिंग बजट बताया और कहा कि यह केवल एक साल का नहीं बल्कि आगामी दो वर्षों के विकास का खाका है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और इस साल को कृषि को समर्पित किया गया है। किसान कल्याण के लिए 1 लाख 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। उन्होंने दावा किया कि राज्य 30 प्रतिशत ग्रोथ के साथ आगे बढ़ रहा है और पूंजीगत व्यय का बेहतर प्रबंधन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तेज गति से विकास कर रही है। उन्होंने बजट को ‘ज्ञान’ आधारित बताते हुए कहा कि इसमें ‘आई’ जोड़कर इसे ‘ज्ञानी’ बनाया गया है, यानी आई फॉर इंडस्ट्रीज। उन्होंने कहा कि यह बजट समृद्ध, सुखद, संपन्न और सांस्कृतिक मध्यप्रदेश के संकल्प को पूरा करने वाला है। साथ ही द्वारका योजना की घोषणा करते हुए उसके लिए पांच हजार करोड़ रुपये का प्रावधान बताया। कर्ज को लेकर उठे सवालों पर उन्होंने कहा कि यह आज का कर्ज नहीं है, बल्कि प्रदेश गठन से चला आ रहा है।
पर्यटन, संस्कृति और धर्मस्व मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यह दिव्य और भव्य सिंहस्थ की तैयारी वाला बजट है और विपक्ष को सवाल उठाने से पहले इसे ठीक से देख लेना चाहिए। उनके मुताबिक बजट में हर वर्ग के लिए प्रावधान किया गया है और सिंहस्थ को भव्य बनाने के लिए पर्याप्त राशि रखी गई है।
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस बजट को जनता से विश्वासघात करार दिया। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने बजट में केवल बड़ी-बड़ी बातें की हैं, लेकिन जनहित के मुद्दे गायब हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव 2023 से पहले भारतीय जनता पार्टी ने जो प्रमुख वादे किए थे, वे बजट भाषण में नजर नहीं आए। किसानों के लिए धान का 3100 रुपये और गेहूं का 2700 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य, लाड़ली बहन योजना में तीन हजार रुपये प्रतिमाह और 450 रुपये में गैस सिलेंडर देने जैसे वादों का जिक्र तक नहीं हुआ।
कमलनाथ ने कहा कि इन वादों को बजट में स्थान न देकर सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह वादा-खिलाफी कर रही है और जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पिछले बजट की घोषणाओं का क्या हुआ और केंद्र से मिलने वाले करों की हिस्सेदारी में संभावित कमी को लेकर सरकार की क्या रणनीति है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य की संयुक्त योजनाओं में प्रदेश को मिलने वाली राशि में कमी आई है और प्रदेश सरकार जनता के हितों को प्राथमिकता देने के बजाय केंद्र के भरोसे बैठी है। कुल मिलाकर एमपी बजट 2026 को लेकर सत्तापक्ष इसे ऐतिहासिक और विकासोन्मुख बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे जनता की उम्मीदों से दूर और विश्वासघात वाला बजट करार दे रहा है।

