कांग्रेस के दलित एजेंडे पर सियासी संग्राम, बीजेपी का पलटवार, मीडिया प्रभारी बोले– मांग का कोई औचित्य नहीं

 भोपाल। मध्यप्रदेश में भोपाल डिक्लेरेशन-2 और कांग्रेस के दलित एजेंडे को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस और खासतौर पर दिग्विजय सिंह बीजेपी के सीधे निशाने पर आ गए हैं। बीजेपी ने कांग्रेस के दलित एजेंडे पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि कांग्रेस में टिकट हमेशा एक ही परिवार के इर्द-गिर्द घूमते रहे हैं, ऐसे में दलित मुख्यमंत्री या दलित प्रतिनिधित्व की मांग का कोई औचित्य नहीं है।

मामले को लेकर बीजेपी मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि कांग्रेस का दलित एजेंडा कोई नया नहीं है, बल्कि यह पिछले करीब 50 सालों से फेल होता आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कभी भी एससी-एसटी वर्ग को उनका वास्तविक हक और सम्मान नहीं दिया, बल्कि सिर्फ वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल किया। आशीष अग्रवाल ने कहा कि खुद कांग्रेस के नेता ही अब मान रहे हैं कि उनका एजेंडा असफल रहा है और कांग्रेस चाहे कोई भी नया एजेंडा ले आए, उसका हश्र फेल होना ही है क्योंकि उसकी राजनीति सिर्फ वोटों तक सीमित रहती है।

दिग्विजय सिंह की खाली हो रही राज्यसभा सीट पर दलित उम्मीदवार को टिकट देने की मांग को लेकर भी बीजेपी ने कांग्रेस को घेरा। आशीष अग्रवाल ने कहा कि कांग्रेस में टिकट हमेशा एक ही परिवार से आते रहे हैं और आगे भी वही होगा, ऐसे में इस तरह की मांग करना ही बेमानी है।

दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने हाल ही में बयान दिया था कि यदि प्रदेश में एससी या एसटी वर्ग से कोई मुख्यमंत्री बनता है तो उन्हें खुशी होगी। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में सियासी पारा चढ़ गया। इसी बयान के समर्थन में कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने दिग्विजय सिंह को पत्र लिखकर राज्यसभा की खाली हो रही सीट पर दलित वर्ग के व्यक्ति को भेजने की मांग कर दी। इस पत्र के सामने आते ही मामला और गरमा गया है। अब यह मुद्दा न सिर्फ कांग्रेस बल्कि बीजेपी के गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया है और माना जा रहा है कि दिग्विजय सिंह का यह सियासी दांव कहीं न कहीं उल्टा उन्हीं पर भारी पड़ता नजर आ रहा है।

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