उत्तर प्रदेश के IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही के इस्तीफे के बाद सियासत तेज हो गई है, जहां उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें लंबे समय से कोई पोस्टिंग और जिम्मेदारी नहीं दी जा रही थी, जिसके चलते उन्होंने पद छोड़ने का फैसला लिया।
अपने विस्तृत पत्र में रिंकू सिंह राही ने कहा कि उन्हें काम करने का अवसर नहीं मिला और सिस्टम में एक समानांतर व्यवस्था चल रही है, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, इस मामले ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है।
इसी मुद्दे पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि एक ईमानदार अधिकारी का इस तरह इस्तीफा देना ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की सच्चाई को उजागर करता है।
अजय राय ने कहा कि जिस अधिकारी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ते हुए गोलियां खाईं, उसे महीनों तक किनारे बैठाए रखना यह दर्शाता है कि सरकार में ईमानदार अधिकारियों को प्रताड़ना और भ्रष्ट लोगों को संरक्षण मिल रहा है।
वहीं इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया देते हुए अधिकारियों से अपील की कि वे भावावेश में कोई निर्णय न लें और कहा कि आने वाले समय में बदलाव के साथ उन्हें उचित सम्मान और जिम्मेदारी मिलेगी।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था और सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिस पर राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है।

