दिल्ली हाई कोर्ट ने चेक बाउंस और लोन भुगतान से जुड़े मामले में अभिनेता राजपाल यादव की जमानत याचिका खारिज कर दी है और उन्हें फिलहाल राहत नहीं मिली है।
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि राजपाल यादव अपनी ही गलतियों की वजह से जेल में हैं और बार-बार वादा करने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया।
राजपाल यादव ने अदालत से अपील की थी कि परिवार में शादी होने के कारण उन्हें जमानत दी जाए, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और अगली सुनवाई सोमवार के लिए तय कर दी।
इसका साफ मतलब है कि अभिनेता को अभी कुछ और दिन तिहाड़ जेल में ही रहना पड़ेगा और फिलहाल उन्हें अंतरिम राहत नहीं मिलेगी।
अदालत ने डेढ़ दशक पुराने लोन विवाद पर नाराजगी जताते हुए कहा कि शिकायतकर्ता को भुगतान करने का भरोसा कई बार दिया गया, लेकिन आज तक रकम वापस नहीं की गई।
सुनवाई के दौरान राजपाल के वकील ने फिर दोहराया कि पैसे चुका दिए जाएंगे, जिस पर कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि हर बार यही बात दोहराई जा रही है और अब सिर्फ आश्वासन से काम नहीं चलेगा।
दोपहर बाद दोबारा शुरू हुई सुनवाई में वकील ने बताया कि वह राजपाल से संपर्क नहीं कर पाए, इसके बाद जमानत याचिका दाखिल की गई, लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को भी स्वीकार नहीं किया।
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने फटकार लगाते हुए कहा कि कम से कम दो दर्जन बार यह कहा गया कि भुगतान कर दिया जाएगा, लेकिन वादे पूरे नहीं हुए, इसलिए ही आज यह स्थिति बनी है।
जमानत याचिका में राजपाल यादव ने यह भी बताया कि 19 फरवरी को उनके परिवार में शादी है और वह अपने भाई श्रीपाल यादव की बेटी की शादी में चीफ गेस्ट के तौर पर बुलाए गए हैं।
हालांकि कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि पारिवारिक समारोह का हवाला देकर बार-बार कानून से राहत नहीं मांगी जा सकती, जब तक पुराने वादों को पूरा नहीं किया जाता।
पूरा मामला 2010 से जुड़ा है जब राजपाल यादव ने एक फिल्म बनाने के लिए दिल्ली के एक बिजनेसमैन से करीब पांच करोड़ रुपये का कर्ज लिया था।
फिल्म फ्लॉप होने के बाद रकम लौटाने का दबाव बढ़ा और बाद में चेक बाउंस के मामले दर्ज हुए, जिनमें 2018 में मैजिस्टरेट कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए छह महीने की सजा सुनाई।
2019 में सेशंस कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा और इसके बाद भी राजपाल यादव कई बार भुगतान का वादा करते रहे, लेकिन बकाया रकम चुकाई नहीं गई।
आखिरकार पैसे नहीं होने का हवाला देते हुए उन्होंने सरेंडर किया और 5 फरवरी 2026 को तिहाड़ जेल भेजे गए, जहां से अब वह जमानत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

