भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र 2026 का दूसरा दिन भागीरथपुरा मुद्दे को लेकर भारी हंगामे के साथ शुरू हुआ। सदन की कार्यवाही से पहले कांग्रेस विधायकों ने विरोध प्रदर्शन किया और इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में कथित दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर सरकार को घेरा। विधायक अपने हाथों में दूषित पानी से भरी बोतलें और तख्तियां लेकर पहुंचे और जमकर नारेबाजी की।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब सरकार जनता से टैक्स लेती है तो क्या उसे स्वच्छ पानी देना उसकी जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण में स्वच्छ पानी की बात कही जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। उन्होंने आरोप लगाया कि इंदौर की जनता श्मशान घाट पहुंच रही है और मंत्री पद पर बने हुए हैं, ऐसे में मुख्यमंत्री को तत्काल मंत्री से इस्तीफा लेना चाहिए।
विपक्ष के हाथों में जो तख्तियां थीं, उन पर सरकार के खिलाफ तीखे संदेश लिखे थे। स्वच्छता का अवॉर्ड मिलने के बावजूद साफ पानी न मिलने, मौतों का हिसाब देने और जिम्मेदार तय करने की मांग जोर-शोर से उठाई गई। कांग्रेस का आरोप है कि भागीरथपुरा की हर मौत सरकार की विफलता का प्रमाण है और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
वहीं सत्ता पक्ष ने भी पलटवार किया। बीजेपी विधायक उमाकांत शर्मा ने कहा कि कांग्रेस को नैतिक रूप से इस्तीफा मांगने का अधिकार नहीं है और यह स्थिति पिछली नीतियों का परिणाम है। उनका कहना था कि जो कमियां रही हैं, उन्हें वर्तमान सरकार सुधारने का काम कर रही है।
दरअसल इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से 25 से अधिक लोगों की मौत का मामला सामने आया था, जिसने पूरे प्रदेश में आक्रोश पैदा कर दिया था। हालांकि आधिकारिक आंकड़े अलग बताए जा रहे हैं, लेकिन इस मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। बजट सत्र की शुरुआत 16 फरवरी से हो चुकी है और यह 6 मार्च तक चलेगा। बुधवार को विधानसभा में अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा। इस सत्र में हजारों प्रश्न, ध्यानाकर्षण और स्थगन प्रस्तावों के साथ कई अहम मुद्दों पर चर्चा होना तय है, लेकिन फिलहाल भागीरथपुरा का मामला सत्र की सबसे बड़ी राजनीतिक बहस बन चुका है।

