देवास। मध्य प्रदेश सरकार बच्चों के पोषण के लिए मध्यान्ह भोजन योजना चला रही है, ताकि स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक खाना मिल सके, लेकिन देवास जिले में इसी योजना को कुछ अफसरों ने कमाई का जरिया बना लिया। बच्चों के निवाले पर डाका डालते हुए मिड-डे मील के नाम पर करीब 23 लाख रुपये अपने और अपने परिवार वालों के खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। मामला सामने आते ही जिला प्रशासन हरकत में आया और कलेक्टर ने सख्त कार्रवाई करते हुए तीन अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया।
देवास जिला पंचायत में पदस्थ मध्याह्न भोजन प्रभारी, पूर्व प्रभारी और कंप्यूटर ऑपरेटर पर गंभीर आर्थिक अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने जांच के बाद भोजन प्रभारी अपर्णा जैन, पूर्व प्रभारी आरती किरावर और कंप्यूटर ऑपरेटर अमन व्यास को बर्खास्त करने के आदेश दिए और इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश भी जारी किए हैं। इसके साथ ही गबन की गई पूरी राशि वसूलने की कार्रवाई भी की जाएगी।
जांच में सामने आया कि मिड-डे मील के नाम पर कूटरचित और फर्जी खातों में रकम ट्रांसफर की गई। आरोप है कि इन खातों में अधिकारियों ने अपने और अपने परिजनों के नाम पर पैसे डलवाए। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि कंप्यूटर ऑपरेटर अमन व्यास ने करीब 12 लाख 29 हजार रुपये का गबन किया, वहीं भोजन प्रभारी अपर्णा जैन पर 2 लाख 48 हजार और पूर्व प्रभारी आरती किरावर पर 8 लाख 53 हजार रुपये की हेराफेरी का आरोप है।
जिला पंचायत के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी एस.एस. सिंह ने मीडिया को बताया कि 23 लाख रुपये की आर्थिक अनियमितता सामने आने के बाद तीनों आरोपियों को बर्खास्त कर दिया गया है और एफआईआर के निर्देश जारी किए गए हैं। यह पूरा फर्जीवाड़ा साल 2021 से 2023 के बीच का बताया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

