शंकराचार्य पर शिकंजा, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ FIR दर्ज, साजिश या सच्चाई?

प्रयागराज. उत्तर प्रदेश में एक बड़ा धार्मिक और कानूनी विवाद सामने आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। उनके साथ उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2 से 3 अज्ञात लोगों के खिलाफ POCSO एक्ट समेत कई धाराओं में झूंसी थाना में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब आरोपों की जांच में जुट गई है।

बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज दो बच्चों को हाईकोर्ट में पेश कर अविमुक्तेश्वरानंद पर यौन शोषण सहित कई गंभीर आरोप लगाए थे। प्रयागराज पुलिस कमिश्नर ने भी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट अदालत में सौंपी थी। इसके बाद 13 फरवरी को हाईकोर्ट ने दोनों बच्चों के बयान दर्ज किए और फिर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। अदालत के निर्देश पर झूंसी थाने में मुकदमा कायम किया गया।

आशुतोष ब्रह्मचारी का कहना है कि उन्होंने कथित घटनाओं से जुड़ी सीडी अदालत को सौंपी है और उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद है। उन्होंने प्रयागराज से विद्या मठ वाराणसी तक पैदल सनातन यात्रा निकालने की भी बात कही है, ताकि लोगों के सामने अपनी बात रख सकें। इस पूरे घटनाक्रम के बाद धार्मिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

वहीं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि आरोप लगाने वाला व्यक्ति खुद हिस्ट्रीशीटर है और फर्जी मुकदमे दर्ज कर उगाही करना उसका काम है। उन्होंने कहा कि जब केस दर्ज हुआ है तो जांच भी पूरी होनी चाहिए और सच सामने आना चाहिए। उन्होंने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए कहा कि बिना जांच के मामला खत्म करना भी सवाल खड़े करेगा। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गौमाता के मुद्दे पर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है और यह मामला भी उसी कड़ी का हिस्सा हो सकता है।

अब इस हाईप्रोफाइल मामले में जांच की दिशा और अदालत की अगली सुनवाई पर सबकी नजर टिकी हुई है।

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