मध्य प्रदेश में वकील समुदाय का गुस्सा इस वक्त चरम पर है। शिवपुरी जिले के करैरा में 14 फरवरी को वरिष्ठ अधिवक्ता संजय कुमार सक्सेना की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई, जिसके बाद पूरे प्रदेश में आक्रोश फैल गया है। आज सोमवार को इस सनसनीखेज वारदात के विरोध में प्रदेशभर के अधिवक्ता न्यायिक कार्य से पूरी तरह दूर रहेंगे। वकील कोर्ट परिसरों में पहुंचेंगे लेकिन किसी भी मामले में पैरवी नहीं करेंगे, जिससे राज्य की लगभग सभी अदालतों में कामकाज प्रभावित रहेगा।
Madhya Pradesh State Bar Council की बैठक में सर्वसम्मति से ‘प्रतिवाद दिवस’ मनाने का निर्णय लिया गया। विभिन्न जिला और तहसील बार एसोसिएशनों ने भी इस हड़ताल का समर्थन किया है, जिससे हजारों मामलों की सुनवाई टलने की संभावना है। अधिवक्ताओं का कहना है कि जब तक उन्हें सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
घटना के दिन अधिवक्ता संजय सक्सेना रोज की तरह बाइक से करैरा सिविल कोर्ट जा रहे थे। सागर ताल और आनंद सागर मंदिर के पास पहले से घात लगाए बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि यह हत्या जमीन विवाद से जुड़ी है। उनका कहना है कि एक पक्ष को केस जिताने के बाद विरोधी पक्ष ने सुपारी देकर इस वारदात को अंजाम दिलाया। परिवार ने शिक्षक कमलेश शर्मा और उनके सरपंच चाचा सुनील शर्मा समेत चार लोगों के नाम बताए हैं। पुलिस जांच में दस लाख रुपये की सुपारी और दो लाख रुपये एडवांस देने की बात सामने आई है, साथ ही चुनावी रंजिश का एंगल भी खंगाला जा रहा है। रविवार को पुलिस ने शॉर्ट एनकाउंटर के दौरान तीन शूटरों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक आरोपी घायल हुआ है, जबकि कुल पांच लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
अधिवक्ताओं की मांग है कि मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए, आरोपियों को सख्त से सख्त सजा मिले और अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट तुरंत लागू किया जाए। वकील आज कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री Mohan Yadav के नाम ज्ञापन सौंपेंगे और चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर मांगें नहीं मानी गईं तो राजधानी भोपाल में बड़ा घेराव और उग्र आंदोलन किया जाएगा।

