खजुराहो। सोचिए अगर एक दिन आपको पता चले कि सरकारी रिकॉर्ड में आप मर चुके हैं, तो क्या गुजरेगी आप पर। मध्य प्रदेश में ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सिस्टम की बड़ी लापरवाही ने एक जिंदा और गर्भवती महिला को कागजों में मृत घोषित कर दिया। हैरानी की बात यह है कि महिला के पेट में पल रहे बच्चे के भविष्य पर भी इस गलती का संकट मंडराने लगा है।
छतरपुर जिले के खजुराहो क्षेत्र से सामने आए इस मामले में राजनगर जनपद के बमीठा थाना क्षेत्र के इमलहा गांव की रहने वाली गीता रैकवार गर्भवती हैं। वह अपने पति मंगलदीन रैकवार के साथ उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन लेने पहुंचीं थीं। आवेदन के दौरान जब आधार सत्यापन हुआ, तो सिस्टम ने बता दिया कि लाभार्थी तो सरकारी तौर पर मृत है। गैस कनेक्शन मिलना तो दूर, अधिकारियों ने पहले खुद को जिंदा साबित करने की सलाह दे दी।
जानकारी के मुताबिक गीता रैकवार का आधार कार्ड सस्पेंड हो गया है, इसी वजह से उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद न उन्हें किसी सरकारी योजना का लाभ मिल पा रहा है, न इलाज और न ही किसी सुविधा की उम्मीद बची है। सुधार के नाम पर हर जगह यही जवाब मिला कि मामला भोपाल या दिल्ली स्तर से ही ठीक हो सकता है।
बीते एक हफ्ते से गर्भवती महिला और उसका पति सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। कभी आधार सेंटर, कभी जनसेवा केंद्र और कभी ब्लॉक कार्यालय, लेकिन हर जगह से निराशा ही हाथ लगी। आखिरकार परेशान होकर दंपति ने बमीठा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसमें साफ कहा गया कि गीता रैकवार जिंदा हैं, लेकिन आधार रिकॉर्ड में उन्हें मृत दिखाया जा रहा है।
अब उम्मीद जताई जा रही है कि पुलिस रिकॉर्ड और प्रशासनिक प्रक्रिया के जरिए आधार में दर्ज मौत की एंट्री हटाई जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि एक सरकारी गलती की सजा एक गर्भवती महिला क्यों भुगते। जब आधार जैसे अहम दस्तावेज में जिंदा इंसान को मृत घोषित किया जा सकता है, तो आम आदमी आखिर किस सिस्टम पर भरोसा करे।

