इंदौर। इंदौर की एक साधारण सी चाय की दुकान है, लेकिन उसके नाम में छुपी है एक असाधारण प्रेम कहानी। दुकान का नाम है “सोनम” और इसके मालिक हैं सुनील जोशी। यह सिर्फ रोज़ी-रोटी का जरिया नहीं, बल्कि सुनील के अधूरे प्यार की पहचान है, एक ऐसा प्यार जो वक्त के साथ कम नहीं हुआ, बल्कि इंतजार बनकर और भी गहरा हो गया।
सुनील बताते हैं कि साल 1997 में उन्हें सोनम से प्यार हुआ। वक्त के साथ दोनों का रिश्ता मजबूत होता गया, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। साल 2009 में सोनम की शादी किसी और से हो गई। उस दिन के बाद सुनील की ज़िंदगी जैसे ठहर सी गई। उन्होंने फिर कभी शादी नहीं की। आज भी अकेले हैं, बिना किसी शिकायत के, बस यादों के सहारे।
सोनम के नाम को लेकर समाज ने कई सवाल खड़े किए। तरह-तरह की बातें हुईं, आरोप लगे, यहां तक कहा गया कि सोनम बेवफा है। लेकिन सुनील आज भी उसी भरोसे के साथ खड़े हैं। वे कहते हैं कि लोगों की बातों से फर्क नहीं पड़ता, उनकी सोनम जैसी वे जानते हैं, वैसी कोई और नहीं जान सकता। सुनील का दर्द भी है कि इंदौर ने उनकी सोनम के नाम को बदनाम किया।
सुनील ने अपनी मोहब्बत को जिंदा रखने के लिए दुकान का नाम सोनम रखा, ताकि हर दिन उस नाम से उनका प्यार सांस लेता रहे। वे कहते हैं कि सोनम की शादी के बाद भी उन्होंने बस यही चाहा कि वह खुश रहे, क्योंकि प्यार का मतलब सिर्फ पाना नहीं होता, कभी-कभी छोड़ देना भी सबसे बड़ा प्यार होता है।
आज भी हर शाम दुकान बंद करते वक्त सुनील की नजर सड़क पर टिक जाती है। शायद कोई जाना-पहचाना चेहरा दिख जाए, शायद सोनम लौट आए। मुस्कुराते हुए वे कहते हैं कि सोनम चाहे जहां भी हो, उनकी यादों में हमेशा जिंदा रहेगी, और हां, आज भी सोनम का इंतजार है। वक्त बदल गया, साल गुजर गए, लेकिन यह कहानी आज भी अधूरी नहीं है, क्योंकि यह कहानी मिलने की नहीं, निभाने की है।

