OBC क्रीमीलेयर पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 8 लाख सैलरी वाले पब्लिक सेक्टर कर्मचारियों को राहत

Supreme Court of India ने ओबीसी क्रीमीलेयर को लेकर एक अहम और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि पब्लिक सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों की 8 लाख रुपये तक की सैलरी को क्रीमीलेयर की आय में नहीं जोड़ा जाएगा। यानी केवल सैलरी के आधार पर किसी को क्रीमीलेयर नहीं माना जाएगा।

कोर्ट के मुताबिक अगर सैलरी के अलावा अन्य स्रोतों से आय होती है, तभी क्रीमीलेयर के नियम लागू होंगे। इस फैसले से उन लाखों परिवारों को राहत मिली है जो सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र में नौकरी करते हैं।

दरअसल अब तक 8 लाख रुपये सालाना आय की सीमा के कारण कई परिवारों के बच्चों को ओबीसी नॉन-क्रीमीलेयर का लाभ नहीं मिल पा रहा था। इसका सीधा असर प्रतियोगी परीक्षाओं पर भी पड़ रहा था और कई छात्र Union Public Service Commission और Madhya Pradesh Public Service Commission जैसी परीक्षाओं में नॉन क्रीमीलेयर सर्टिफिकेट न मिलने के कारण बाहर हो जाते थे।

बताया गया कि साल 2014 से कई ऐसे कर्मचारी भी प्रभावित हो रहे थे जो Oil and Natural Gas Corporation या कोयला खदानों जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं में काम करते हैं। इनकी सालाना सैलरी 8 लाख के आसपास होने के कारण उनके बच्चों को भी क्रीमीलेयर मान लिया जाता था और उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाता था।

कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि क्रीमीलेयर का नियम मुख्य रूप से उच्च पदों पर कार्यरत अधिकारियों पर लागू होता है। Ram Nandan Committee की सिफारिशों के अनुसार यह नियम मुख्य रूप से क्लास वन अधिकारियों या ऐसे मामलों में लागू होगा जहां पति और पत्नी दोनों क्लास टू अधिकारी हों या फिर किसी अधिकारी को 40 साल की उम्र से पहले क्लास टू से क्लास वन में प्रमोशन मिला हो।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद ओबीसी वर्ग के हजारों छात्रों और परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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