वाराणसी. उत्तर प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का तीखा पलटवार सामने आया है स्वामी ने कहा कि योगी आदित्यनाथ पर पहले 40 से ज्यादा मुकदमे दर्ज थे और मुख्यमंत्री बनने के बाद वे मुकदमे हटवा दिए गए ऐसे में यह कैसा कानून का पालन है क्या कानून में कहीं लिखा है कि कोई व्यक्ति बड़े पद पर पहुंचते ही अपने ऊपर से सारे मुकदमे हटवा सकता है उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कानून का पालन करना ही है तो अपने ऊपर दर्ज सभी मामलों का अदालत में सामना क्यों नहीं किया जाता।
मीडिया से बातचीत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा में खड़े होकर कानून पालन की बात करना और दूसरी ओर मुकदमे हटवाना दोहरा मापदंड है उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए और किसी भी पद पर बैठा व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं हो सकता।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शंकराचार्य पद को लेकर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि सनातन धर्म में किसी भी शंकराचार्य की पहचान राजनीतिक स्वीकृति से नहीं होती यह धार्मिक परंपरा और आध्यात्मिक मानदंडों से तय होती है उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी मुख्यमंत्री या सरकार को यह अधिकार नहीं है कि वह प्रमाणपत्र देकर किसी को शंकराचार्य घोषित करे इस संदर्भ में उन्होंने स्वामी वासुदेवानंद का उल्लेख करते हुए कहा कि अदालतों ने भी इस विषय में रोक लगाई है और बार बार निर्देश दिए हैं कि उन्हें शंकराचार्य न कहा जाए ऐसे में राजनीतिक मान्यता देना परंपरा के खिलाफ है।
इस पूरे विवाद में समाजवादी पार्टी को लेकर भी बयान सामने आया जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन में सपा पर निशाना साधते हुए कहा था कि अगर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य थे तो उन पर लाठीचार्ज क्यों कराया गया इस पर जवाब देते हुए स्वामी ने कहा कि जिस समय लाठीचार्ज हुआ था उस समय वे शंकराचार्य नहीं थे और अगर सपा ने गलत किया तो गलत किया लेकिन वही गलती दोहराई जाए तो वह भी गलत ही कहलाएगी उन्होंने कहा कि अगर समाजवादी पार्टी गलत है तो आज वही काम करने पर योगी आदित्यनाथ भी गलत हैं।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन में कहा था कि कानून सबके लिए बराबर है मुख्यमंत्री का पद किसी कानून से ऊपर नहीं हो सकता और भारत की संवैधानिक व्यवस्था में हर नागरिक को कानून का पालन करना चाहिए इसी बयान पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सवाल खड़े करते हुए सरकार और व्यवस्था पर तीखा प्रहार किया है।

