अयोध्या। अयोध्या में रामलला प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ के भव्य उत्सव में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए। इस मौके पर राजनाथ सिंह ने कहा कि आज का दिन हर रामभक्त और हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है, क्योंकि वही ऐतिहासिक समय पूरा हुआ है जब भगवान श्रीराम ने अवध की धरती पर पुनः अपने भक्तों को दर्शन देने का संकल्प पूरा किया। उन्होंने कहा कि यह वही भूमि है जिसने वर्षों तक पीड़ा, संघर्ष और रक्तरंजित इतिहास देखा, लेकिन अपने राम के लिए धैर्य और आस्था नहीं छोड़ी।
राजनाथ सिंह ने कहा कि आज जब राम मंदिर के शिखर पर केसरिया ध्वज लहरा रहा है, तो उससे टकराती हवाएं पूरी दुनिया को यह संदेश दे रही हैं कि यह वही सभ्यता है, जिसे मिटाने के लिए न जाने कितने आक्रांता आए, लेकिन वे खुद इतिहास के पन्नों में सिमट गए। आज उनके कोई निशान नहीं बचे, जबकि हमारी संस्कृति और हमारे ध्वज समंदर पार तक गर्व से लहरा रहे हैं।
उन्होंने अयोध्या को सर्वसमावेशिता का जीवंत उदाहरण बताते हुए कहा कि यहां माता शबरी मंदिर, निषादराज मंदिर, सुग्रीव मंदिर और वाल्मीकि मंदिर जैसे अनेक स्थल न केवल आध्यात्मिक दिव्यता का प्रतीक हैं, बल्कि सामाजिक समरसता और एकता का संदेश भी देते हैं।
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि प्रभु श्रीराम के जीवन से हमें यह सीख मिलती है कि समय सबका न्याय करता है। जिन्होंने राम, रामराज्य और अयोध्या-अवध के विकास का साथ दिया, वे आज प्रभु की कृपा से राष्ट्र सेवा में अग्रसर हैं। वहीं जिन्होंने कभी संतों, वैरागियों और नागा साधुओं पर गोलियां चलवाईं और त्याग-तपस्या को कुचलने का पाप किया, उनकी स्थिति आज पूरी दुनिया के सामने है।
उन्होंने कहा कि श्रीराम के जीवन में दिखाई देने वाली सामाजिक समरसता आज राम मंदिर परिसर में सजीव रूप में दिखाई देती है और यही अयोध्या का सबसे बड़ा संदेश है, जो आने वाली पीढ़ियों को भी दिशा देता रहेगा।

