दो साल पहले तीन जान लेने वाले ‘गजराज’ की फिर दस्तक, बांधवगढ़ से हनुमना तक 15 दिनों का रोमांचक सफर

मऊगंज। विंध्य के जंगलों से निकलकर आबादी की चौखट तक पहुंचे दो हाथियों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। ये सिर्फ हाथियों का एक जोड़ा नहीं, बल्कि इनमें से एक का अतीत बेहद खौफनाक रहा है। दो साल पहले शहडोल जिले के जयसिंहनगर में तीन लोगों की जान लेने वाला वही रेडियो कॉलर लगा नर हाथी अब मऊगंज और हनुमना के रास्तों पर दिखाई दे रहा है।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की शांत वादियों से निकलकर यह जोड़ा पिछले पंद्रह दिनों से लगातार सफर पर है। हर दिन करीब 20 से 25 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए ये गजराज जंगलों से निकलकर आबादी के करीब पहुंच रहे हैं। पहले मऊगंज, फिर हनुमना और अब दोबारा मऊगंज होते हुए चुरहट की दिशा में उनका रुख बताया जा रहा है।

वन विभाग के सूत्रों के मुताबिक, इस जोड़े में मौजूद नर हाथी वही है जिसने दो साल पहले भारी तबाही मचाई थी। उस घटना के बाद उसे रेस्क्यू कर रेडियो कॉलर पहनाया गया था और फिर से जंगल में छोड़ दिया गया था। आज वही रेडियो कॉलर उसकी पहचान और ट्रैकिंग का सबसे बड़ा जरिया बना हुआ है।

प्रशासन इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। जैसे ही हाथियों की लोकेशन किसी गांव के पास मिलती है, एहतियातन वहां की बिजली सप्लाई बंद कर दी जाती है। वन विभाग की टीम पल-पल की मूवमेंट पर नजर बनाए हुए है। ग्रामीणों से साफ अपील की गई है कि वे हाथियों को उकसाएं नहीं, पत्थर न मारें और सुरक्षित दूरी बनाए रखें। कोशिश यही है कि न किसी इंसान को नुकसान पहुंचे और न ही इन बेजुबान वन्य जीवों को कोई खतरा हो।

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