लापरवाही की हद! मिड-डे मील में बच्चों के साथ बकरियां भी खा रही खाना — निजी भवन में चल रहा आंगनवाड़ी केंद्र

कटनी (ढीमरखेड़ा)। मध्य प्रदेश के कटनी जिले के ढीमरखेड़ा से एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है, जो प्रशासनिक अव्यवस्था का पूरा सच दिखाती है। यहां आंगनवाड़ी के मासूम बच्चे उसी जगह मिड-डे मील खा रहे हैं, जहां बकरियां भी उसी थाली में मुंह डालकर खाना खा रही हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ दिखता है—दो बच्चे जमीन पर बैठे हैं, उनके ठीक पास दो बकरियां भी उसी भोजन पर टूट पड़ी हैं। यह नजारा सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि बच्चों की सेहत और अधिकारों से सीधा खिलवाड़ है।

जाँच में सामने आया कि कार्यकर्ता और सहायिका दोनों की अनुपस्थिति के कारण आंगनवाड़ी केंद्र एक निजी भवन में चल रहा था। यही वजह थी कि बच्चों के खाने पर बकरियों का कब्जा जैसा दृश्य कैमरे में कैद हो गया। वीडियो वायरल होते ही परियोजना अधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पर्यवेक्षक को नोटिस जारी किया है।

सबसे बड़ी समस्या ये है कि सेहरा टोला में अभी तक आंगनवाड़ी का अपना भवन ही नहीं है। स्वीकृत भवन बैगा मोहल्ले में बनाया जा रहा है, जो गांव से पूरे 2 किलोमीटर दूर है। नतीजा यह हुआ कि आंगनवाड़ी को मजबूरी में निजी जगह पर चलाना पड़ रहा था… और वहीं से ऐसी अव्यवस्था पैदा हुई।

ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ बच्चे ही नहीं, महिलाओं को भी समय पर टीकाकरण का लाभ नहीं मिल पा रहा। बैगा समाज के विरोध के बाद भवन की जगह बदली गई थी और उस वक्त अधिकारियों ने वादा किया था कि सेहरा टोला के लिए नया भवन, नई कार्यकर्ता और नई सहायिका जल्द नियुक्त की जाएगी। लेकिन महीनों बीत गए—न भवन बना, न नियुक्ति हुई… और अब हालात सबके सामने हैं।

इसी बीच आदिवासी ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री और कलेक्टर से अपील की है कि सेहरा टोला में तुरंत आंगनवाड़ी भवन और स्टाफ की नियुक्ति की जाए, ताकि बच्चों और महिलाओं को होने वाली परेशानी खत्म हो सके।

परियोजना अधिकारी आरती यादव का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा—“लापरवाही की शिकायत मिली है। सेक्टर सुपरवाइजर को नोटिस दिया गया है। मैं खुद गांव जाकर सभी समस्याओं का समाधान कराऊंगी।”

यह पूरा मामला सिर्फ एक वीडियो का नहीं, बल्कि उस सिस्टम का आइना है जो बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी उठाता है… और जब वही सिस्टम डगमगाए, तो ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं।

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